उज्जैनदेश

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कामकाज से संघ नाखुश।

उज्जैन। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कामकाज को लेकर जो फीडबैक संघ को प्राप्त हुआ है उसे लेकर संघ का शीर्ष नेतृत्व चिंतित है। परिषद अपने काम और उद्देश्य प्राप्ति में कमतर रही है। छात्रों और शिक्षा परिसरों में परिषद का काम तो बड़ा है लेकिन वैचारिक आधार पर काम नही हो पा रहा है।
उज्जैन में चल रही संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में विद्यार्थी परिषद के कामकाज पर फीडबैक के आधार पर गहन विचार विमर्श हुआ है।
संघ को प्राप्त फीडबैक के अनुसार परिषद भाजपा के युवा मोर्चे की नर्सरी बन गई है। जो भी छात्र परिषद से जुड़ रहे है उनका आधार विचारधारा न होकर भाजपा युवा मोर्चे में जगह बनाना है।
परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता कॉलेज और विश्वविद्यालयों के केम्पस में शक्ति केंद्र बन गए है उनका काम विचारधारा को बढ़ाना है पर वे केवल पास-फेल और नम्बर बढ़ाने की राजनीति में लगे है।
छात्र राजनीति में भी परिषद को पहले जैसी सफलता नही मिल पा रही है। दमदार छात्र नेताओं का अभाव साफ दिख रहा है। परिषद से कार्यकर्ताओं का निर्माण कम हो रहा है,जबकि आज जो नेता सरकार और भाजपा का नेतृत्व कर रहे है सभी परिषद से ही आए है।
संघ को प्राप्त फीडबैक के अनुसार परिषद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संघ एजेंडे पर भी ठीक से काम नही कर पा रही है। अभी भी वैचारिक संस्थानों पर संघ विचारधारा के लोगो का कब्जा नही हो सका है। जोड़ तोड़ कर कतिपय लोग परिषद को विश्वास में लेकर कुलपति,कार्यपरिषद सदस्य,शैक्षिक निकायों के प्रमुख बन रहे है। जो काबिल लोग विचारधारा से है वे हाथ पर हाथ धरे बैठे है। पाठ्यक्रम में भी वांछित बदलाव पर परिषद की भूमिका कमजोर रही है। नई शिक्षा नीति को लेकर सुझाव तो दिए गए है पर उनपर कोई अमल नही हुआ है।
छात्र संघ चुनावों में भी परिषद की सफलता का ग्राफ गिर रहा है।
गौरतलब है कि भारत के सबसे बड़े संगठित छात्र संगठन की पहचान विद्यार्थी परिषद की रही है।
सूत्रों के अनुसार संघ के फीडबैक में यह तथ्य भी सामने आया है कि जैसे जैसे संसाधन बड़े है वैचारिक आधार कमजोर हुआ है।
संघ परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओ और संगठन मंत्रियों के कामकाज से भी खुश नही है। यह वर्ग भाजपा के संगठन मंत्रियों की तरह सुविधाभोगी हो गया है। अब ये लोग छात्रों के बीच कम कुलपतियों,शिक्षा संस्थानों के अलमबरदारों के बीच ज्यादा समय गुजारते है।
बहरहाल संघ अपने सबसे प्रिय अनुषांगिक संगठन विद्यार्थी परिषद को लेकर खासा चिंतित है। संघ की चिंता प्रस्थान बिंदु पर व्यापक कमजोरी को लेकर है। यदि परिषद में कार्यकर्ताओं का निर्माण नही होगा तो संघ,भाजपा,विहिप,किसान संघ जैसे जन संगठनों को समर्पित कार्यकर्ता कैसे मिलेंगे।

प्रकाश त्रिवेदी@samacharline