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उखठा रोग की बीमारी से चना हो सकता है खराब मावठे के इंतजार में किसान चिंतित,पीले हो रहे चने के पौधे

उखठा रोग की बीमारी से चना हो सकता है खराब
मावठे के इंतजार में किसान चिंतित,पीले हो रहे चने के पौधे
देवास। इस वर्ष मानसून की बेरुखी का असर दिखाई देने लगा है सिंचाई के लिए जल स्त्रोतों ने अभी से जवाब दे दिया है पिछले दिनों से छाए हुए बादलों से मोटे कि आज जरूर जाएगी है यदि कुछ दिन और मावठे की बारिश नहीं होती है तो फसल भगवान भरोसे ही रह जाएगी। ऐसी स्थिति में किसानों के माथे पर चिंता की लकीर साफ तौर पर दिखाई दे रही है। साथ ही इस बार चने की फसल बहुत अधिक मात्रा में की गई है जिसका मुख्य कारण चने का रकबा भी कई गुना बडा है। इस वजह से किसानों के पास स्टीफाईड बीज नही पंहुच सका। मौसम के अनुकूल नहीं होने से फसल में बीमारी लग रही है चने के पौधे पीले होकर सुख रहे हैं परेशान कृषकों को अब बस मावठे का आसरा है अगर आने वाले दिनों में मावठा गिर जाता है तो फसल में नई जान आ जाएगी।
उखठा रोग की बीमारी से परेशान

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इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण जल स्त्रोतों में बहुत कम मात्रा में पानी संग्रहण रहने से किसानों को बीच में जल स्त्रोत सिंचाई में साथ छोड़ सकते हैं इसलिए अधिकतर किसानों ने चने की फसल लगा रखी है। बांगर के कृषक विजयसिंह एवं सौरभ सचान ने बताया कि चने के पौधों में उखठा रोग की बीमारी भी देखी जा रही है जिसके चलते चने का पौधा जड़ से पुरा सुख जाता है साथ ही पीले होकर मुरझा भी रहे है। ऐसी स्थिति में बादलों से क्षेत्र के किसानों को अधिक मात्रा में नुकसान होने की संभावना लग रही है। इधर रात में ओस भी नहीं गिर रही है जिससे गेंहू के पौधों में वृद्धि नहीं हो पा रही है अब मात्र किसानों का मावठा ही सहारा है।