देशप्रकाश त्रिवेदी की कलम सेमध्य प्रदेश

उत्तर गुजरात मे कांग्रेस को चेहरे की और भाजपा को जीतने वाले उम्मीदवारों की तलाश।

श्यामला जी। देवभूमि श्यामला जी उत्तर गुजरात का प्रमुख तीर्थ स्थल है।

यहाँ भगवान विष्णुस्व यंभू विराजित है। कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ मन्नत मांगने के लिए जनसैलाब उमड़ता है। इस जनसैलाब में कांग्रेस, भाजपा के नेता भी अपनी उम्मीदवारी और विजय श्री का वरदान मांग रहे है।

उत्तर गुजरात मे कांग्रेस को चेहरे और भाजपा को जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश है।
यह जानना जरूरी है कि उत्तर गुजरात मे 6 जिले और 33 विधानसभा सीटे है। यहाँ कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। शंकरसिंह वाघेला का यह गढ़ है। यहाँ के अरावली , सांवरकाठा,बनासकांठा,मेहसाणा
ग़ांधी नगर,पाटन, जिलो में कांग्रेस का बहुत प्रभाव हैं। कांग्रेस के ज्यादातर विधायक इन्ही जिलों से है,और जिला तथा तालुका पंचायतों में कांग्रेस का कब्जा है।
लेकिन शंकर सिंह वाघेला के कांग्रेस से जाने के बाद उत्तर गुजरात मे कांग्रेस के पास प्रभावी चेहरा नही है। उनके साथ बलबंत सिह राजपूत के भी जाने के बाद बक्शीपंच ठाकुरों में कांग्रेस कमजोर हुई है।
यहाँ के ज्यादातर प्रभावशाली कांग्रेस नेता वाघेला के समर्थक है,अब वाघेला द्वारा जनविकल्प पार्टी बना लेने के बाद इन नेताओं का असमंजस बढ़ गया है। यहाँ के एक प्रभावी कांग्रेस विधायक राजू चावड़ा पहले ही भाजपा में जा चुके है।
उत्तर गुजरात मे मजबूत रही कांग्रेस यदि प्रभावी चेहरा नही तलाश पाई तो नुकसान में रह सकती है।
इस इलाके में पाटीदार आंदोलन का सबसे ज्यादा असर रहा है। भाजपा की चिंता यहाँ योग्य जिताऊ उम्मीदवारों को तलाशने की है। 2012 के विधानसभा चुनाव में व्यक्तिगत जिद के कारण उत्तर गुजरात ख़ासकर मोडासा अरावली जिले में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी थी,जिले की सभी सीटे कांग्रेस जीत गई थी।
गुजरात भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस बार उत्तर गुजरात पर खास फोकस है। यहाँ अरसे से समर्पित और निष्ठांवान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई है। बाहरी व्यक्तियों को तवज्जों मिलती रही है। इस कारण जमीनी कार्यकताओं में उपेक्षा का भाव पनपा है इसी का खामियाजा पार्टी को विधानसभा और पंचायत चुनावों में भुगतना पड़ा है।
2002 के बाद पहली बार गुजरात चुनाव में संघ की भूमिका दिखाई दे रही है। संघ के सूत्र बताते है कि उत्तर गुजरात मे इस बार जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व दिया जाएगा। जो जीतने योग्य होगा उसको ही लड़ाया जाएगा।
उत्तर गुजरात मे नोटबंदी और जीएसटी का असर कम है।
उत्तर गुजरात मे पाटीदार,बक्शीपंच ठाकुर और जनजाति की बहुलता है भाजपा को यहाँ बहुत सावधानी से उम्मीदवारों का चयन करना होगा वही कांग्रेस को अपनी ताकत बचाने के किए शंकर सिंह वाघेला की मजबूत काट तलाशना होगा।
बहरहाल गुजरात चुनाव की असली लड़ाई उत्तर गुजरात मे ही है।

प्रकाश त्रिवेदी@samacharline.com