आलेखविशेष

कांग्रेस का हाथ कन्हैया के साथ ?(-डॉ. गुलरेज़ शेख )

श्री शशि थरूर द्वारा अराजक तथा राष्ट्रद्रोह के प्रकरण के दोषी छात्र लालभाई कन्हैया की तुलना भारत माता के सपूत शहीद-ऐ-आज़म भगतसिंह से करना थरूर के राष्ट्रवादी विचार के दिवालियेपन का प्रखर प्रमाण है। यह इस तथ्य को भी प्रकाशित करता है कि कांग्रेस राज में कैसे कैसे मंत्री एवं सांसद तथाकथित “हो रहा भारत निर्माण” कर रहे थे। यही कारण था कि देश की गति के पहिये को जंग लग गई थी तथा राष्ट्रविरोधियों के साहस शिखर प्राप्ति की ओर अग्रसर थे, जिसका प्रमाण राष्ट्रावादी सरकार के गठन से चारों खाने चित हुए ये तत्व राष्ट्रवाद के पुनर्जागरण से ऐसे भयभीत हैं जैसे सिंह से समक्ष बकरी तथा सरकार को अस्थिर करने की मंशावश एड़ी चोंटी का जोर लगा रहे हैं।

जो विपक्ष भ्रष्टाचार विहीन दो वर्षीय सरकार के विरुद्ध मोर्चाबन्द वह भारतीय समाज को जातियों में खण्ड खण्ड कर स्वयं की खिसकी हुई राजनैतिक ज़मीन को पुनःस्थापित करने हेतु राजनैतिक नैतिकता के इतने निचले पायदान पर जा गिर है कि संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के जाति विहीन तथा समतायुक्त सामजिक विचार को ध्वस्त करने हेतु हर संभव रूप से प्रयासरत है, वह भी राष्ट्रपुरुष बाबासाहेब के नाम की माला जपते जपते।

यदि विषय को थरूर के बयान पर ही केंद्रित रख उसका राजनैतिक विश्लेषण किया जाए तो बयान के पीछे की कहानी कुछ और ही कहती है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की निरुप्योगिता से सम्भवतः कांग्रेसजन भी ऊब गये हैं तथा सम्भवतः कांग्रेस के प्रथम परिवार के इकलौते वारिस पुत्र पार्टीजनों की पीठ पर ऐसे बोझ बन गए हैं जिसे थकने के उपरांत भी उतारने का दम किसी में नहीं। अतः सम्भवतः पुनःसत्ताप्राप्ति की मंशावश वरिष्ठ कांग्रेसजन राहुल गांधी को हटा असम तथा बंगाल चुनाव हेतु कन्हैया जैसों को अपना पोस्टरबॉय बनाने पर विवश हैं। चुनावों के परिणाम के माध्यम से जनता ऐसे पोस्टरों पर कालिक पोत राष्ट्रवाद का परिचय देगी तथा राष्ट्रीय अखंडता से समझौता कर राजनैतिक ज़मीन तैयार करने वालों को ज़मीन के स्थान पर दलदल में धकेल कर ही पुरस्कृत करेगी और यह कथन भी अतिश्योक्ति नहीं कि २०१९ के लोकसभा चुनावों में ४४ नम्बरी पार्टी को ४ नम्बरी कर दे जिसका नेतृत्व स्वयं श्री राहुल गांधी जी करेंगे।

यद्धपि कांग्रेस पार्टी ने जन भावना को स्वयं के विरुद्ध देख थरूर के बयान से पल्ला झाड़ लिया पर राष्ट्रद्रोह का मामला झेल रहे व्यक्ति को राष्ट्रनायक के समकक्ष खड़े करने वाले थरूर पर क्या कार्यवाही की ?

कांग्रेस पार्टी को मेरा निःशुल्क परामर्श है कि जनभावना से खिलवाड़ करने का दुःसाहस न करे क्योंकि लोकतंत्र में जनता ने ऐसी गतिविधयों के कारणवश ही कांग्रेस को अर्श से फर्श पर ला पटका है और यदि अब भी कांग्रेस ना सुधरी तो फर्श के नीचे एक ही स्थान होता है जिसे कब्रिस्तान कहते हैं।

भारत का नागरिक होने के कारण थरूर के बयान से मुझे पीड़ा भी है तथा मैं क्षुब्ध भी हूँ। यदि श्रीमती सोनिया गांधी आम भारतीय नागरिक की ह्रदयपीड़ा को समझ सकें तो मैँ उनसे करबद्ध विनती करता हूँ कि शशि थरूर को पार्टी से निष्काषित कर एक कठोर सन्देश देने का कष्ट करें ताकि उनका कोई और नेता शहीद-ऐ-आज़म भगत सिंह जैसे राष्ट्रनायकों का अपमान करने का दुःसाहस न करे।

कार्यवाही का न होना मेरे जैसे करोड़ों भारतवासियों के मन में कांग्रेसपार्टी की राष्ट्रवाद के प्रति निष्ठा पर प्रश्नचिंह लगा देगा।

(लेखक भारतीय जनता पार्टी, मध्य प्रदेश के अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य हैं)