प्रकाश त्रिवेदी की कलम सेभोपालमध्य प्रदेश

किसान आंदोलन- सरकार के किसान विरोधी रवैये से संघ नाराज।

भोपाल। केंद्र और भाजपा शासित राज्य सरकारों के किसान विरोधी रवैये से संघ के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ में गहरी नाराजगी है। कल से शुरू हुए किसान आंदोलन ने जिस तरह निबटने की रणनीति बनाई गई है उसे लेकर किसान संघ ने उच्च स्तर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है।

गौरतलब है कि किसान आंदोलन को लेकर सरकार का शुरुआती रवैया चलताऊ था। प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से नही लिया। पुलिस और उसका खुफिया तंत्र भी नाकाम साबित हुआ।
किसान आंदोलन में नेतृत्व को लेकर उभरे असमंजस ने भी आंदोलन को दिशाहीन कर दिया।
जगह-जगह आंदोलन के हिंसक और उपद्रवी होने के बाद प्रशासन की सख्ती ने किसान संघ को नाराज कर दिया है। अब किसान संघ आंदोलन के सूत्र अपने हाथ मे लेने की तैयारी कर रहा है।
भारतीय किसान संघ के सूत्रों के अनुसार विगत तीन सालों से किसानों को अपनी फसल की सही कीमत नही मिल पा रही है।
मध्यप्रदेश में गेहूं की बम्पर फसल होने के बाद भी शिवराज सरकार ने 10 लाख मैट्रिक टन गेंहू ऑस्ट्रेलिया से आयात कर लिया है,लिहाजा गेंहू की फसल को उचित समर्थन मूल्य नही मिल पा रहा है।
इसी तरह गत वर्ष दालों की कीमत में हुए उतार चढ़ाव से चिंतित प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से दाल उत्पादन की अपील की थी। अब जब दाल की बम्पर फसल तैयार है,सरकार ने मोजाम्बिक से दाल आयात कर ली है। अब किसानों को लागत भी नही मिल पाएगी।
भारतीय किसान संघ की मांग है कि किसान को उनकी उपज की लागत से लाभ जोड़कर कीमत मिलनी चाहिए। यदि बाजार से कीमत नही मिलती है तो सरकार को उपज खुद खरीदना चाहिए।
आलू,टमाटर में गत तीन सालों से किसान को लाभ नही हो रहा है। किसान इसे फैंकने पर मजबूर है।
बहरहाल खेती किसानी को लाभ का धंधा बनाने की बात करने वाले मोदी और उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री किसान आंदोलन की व्यापकता को लेकर सकते में है।
किसान खुद आंदोलन में आ रहे है,उनका नेतृत्व दिशाहीन जरूर है,लेकिन आंदोलन की तीव्रता को बता रही है कि भाजपा का वोटबैंक खतरे के निशान पर आने को है।

प्रकाश त्रिवेदी@samacharline