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जिला अस्पताल में 4 घंटे तक कड़कड़ाती ठंड में परिजन नवजात शिशु के शव को लेकर हुए परेशान

जिला अस्पताल में 4 घंटे तक कड़कड़ाती ठंड में परिजन नवजात शिशु के शव को लेकर हुए परेशान
देवास। जिला अस्पताल में फिर एक नवजात की अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही के चलते मौत हो गई और गरीब परिवार के लोग बच्चे का शव और मां को ले जाने के लिए 4 घंटे तक बीती रात कड़कड़ाती ठंड में वाहन का इंतजार करते रहे ।
जिला अस्पताल में ललिता पति संतोष निवासी बढिय़ा मांडू को 17 दिसम्बर को चौबाराधीरा स्वास्थ्य केंद्र में नार्मल डिलेवरी से लड़का हुआ था। जिसके बाद नवजात शिशु को 18 दिसम्बर को टोंक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के बाद 19 दिसम्बर की रात में निमोनिया होने पर जिला अस्पताल में रेफर किया गया। जिसके बाद शिशु को जिला अस्पताल में बच्चों के गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया था। लेकिन गुरूवार की शाम को 5 बजे तक सब ठीक था और परिवारजनों सहित उसके पिता,काका,चाचा सहित अन्य लोगों ने जिला अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही के चलते शिशु की मौत का आरोप लगाते हुए बताया कि दोपहर तक सब नॉर्मल था और डॉक्टर सुबह बोल कर गए थे कि 5 बजे देखने आऊंगा लेकिन डयूटी पर जो डाक्टर होना चहिये वह भी 5 बजे तक नहीं आए जिसको बाद शाम 6 बजे बताया कि शिशु की मौत हो गई है। साथ ही परिजनों ने यह भी बताया कि हमने यहां स्टाफ को डॉक्टर से गंभीर होने पर इंदौर ले जाने का भी पूछा था लेकिन उन्होंने ठीक होने का बताकर यहीं पर रखा और उसकी सही देखभाल नहीं होने पर जिला अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही के कारण उनका बच्चा मृत होने का आरोप लगा रहे है। वही यह भी बताया कि अस्पताल में जो लोग पैसा नहीं देते उनका ठीक ढंग से उपचार नहीं किया जाता हम गरीब लोगों ने पैसे नहीं दिए इसके कारण हमारे साथ अन्याय किया गया अगर बच्चा गंभीर था तो उसे इंदौर रेफर क्यों नही किया गया । इस मामले की जाँच कराने की मांग की। जिसके बाद मृत शिशु को ले जाने के लिए बीती राम अस्पताल परिसर के बाहर 4 घंटे का नही किया गया । शाम 7.00 बजे से नवजात शिशु के शव को उसकी मां और परिजन के अन्य लोग लेकर जिला अस्पताल के बाहर जमीन पर बैठकर कड़-कड़ाती ठंड में लेकर बैठे रहे। रात 10 बजे के बाद तक उन्हें गांव भेजने के लिए वाहन की व्यवस्था भी नहीं की गई तो गांव से कुछ लोगों ने आकर चिल्ला चोट करी ओर नवजात शिशु का शव अस्पताल परिसर में ही गाडऩे की बात कही तब जाकर घबराये अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा रात्रि पोने 11 बजे निजी अस्पताल से एंबुलेंस से समझा बुझा कर उन्हें रवाना किया गया ।

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