देशप्रकाश त्रिवेदी की कलम से

दांडी कुटीर- नेहरू जी के बिना गांधी की जीवन यात्रा का डिजिटल आलोकन।

अहमदाबाद। गांधी जी का जिक्र हो और नेहरू जी का नाम न आए,क्या यह संभव है। सामान्य तौर पर गांधी जी की कोई भी चर्चा नेहरू जी के बिना अधूरी लगती है। लेकिन गांधीनगर में बनी अत्याधुनिक जर्मन तकनीकी से निर्मित दांडी कुटीर में गांधी जी की जीवन यात्रा को नेहरूजी के बिना ही 3 डी तकनीकी से दिखाया जा रहा है।

पोरबंदर से लेकर बिरला हॉउस तक की जीवन यात्रा को इस तरह संजोया गया है कि कही भी नेहरू जी,या उनके पिता मोतीलाल नेहरू तक का जिक्र नहीं आता है।
स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को गोखले,तिलक,सरदार पटेल, तक सीमित कर दिया है।
राजगोपालाचारी,और खान अब्दुल गफ्फार खान का नाम का भी जिक्र है। लेकिन तीन मंजिला दांडी कुटीर में नेहरू या इंदिरा का कही भी नाम नहीं है।
दांडी कुटीर का निर्माण महात्मा मंदिर परिसर में नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री रहते कराया था। तीन मन्ज़िल पिरामिडनुमा अत्याधुनिक इमारत में हर तरफ गाँधी दर्शन पसरा हुआ है।
गाँधी जी की कहानी को उनके बड़े भाई करसन भाई, पत्नी कस्तूरबा,और गोखले-पटेल के नरेशन में उनके नजरिये से प्रस्तुत किया गया है।
इस विश्व स्तरीय इमारत में दुनिया भर के राजनेताओं, विद्वानों,संतो,जननेताओं के गाँधी जी के संबंध में विचार भी संजोए गए है। किसी भी चित्र या नरेशन में नेहरू जी का नाम या जिक्र तक नहीं है। आंबेडकर जरूर है। जिन्ना भी है।
बहरहाल नेहरू के अनन्तर गांधी जी की जीवन यात्रा को देखना रोमांच पैदा करता है और मोदी की कांग्रेस मुक्त भारत की संकल्पना की जड़ को उदघाटित करता है।

प्रकाश त्रिवेदी@samacharline