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दार्शनिक शिवराज की सोशल इंजीनियरिंग।

भोपाल। दर्शनशास्त्र के विद्यार्थी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चौथी पारी खेलने के लिए सोशल इंजीनियरिंग का सहारा ले रहे है। अभी हाल ही के मंत्रिमंडल विस्तार में काछी समाज के नारायण सिंह कुशवाह,लोधी समाज के जालम सिंह पटेल और पाटीदार समाज के बालकृष्ण पाटीदार को मंत्री बनाकर उन्होंने चौथी बार जीतने के लिए समाजिक समीकरण साधने के अपने इरादे जाहिर कर दिए है।
शिवराज हमेशा चुनावी मोड़ में ही रहते है,लिहाजा अपनी कद्दावर लोकप्रिय छवि के अलावा और कोई भी कसर छोड़ना नही चाहते।
प्रदेश में निवासरत समाज जीवन मे प्रभाव रखने वाली जातियों को वे साथ रखकर कांग्रेस को कोई अवसर देने के मूड में नही है।
प्रजापति समाज को खुश रखने की कवायद में माटी कला बोर्ड पहले से ही कार्यरत है।
नाई समाज के लिए केश कला बोर्ड बना दिया गया है। नाई समाज की भूमिका जनमत बनाने में जगजाहिर है।
दर्जी समाज को खुश करने के लिए शिवराज ने सिलाई कला बोर्ड भी बना दिया है। सहरिया आदिवासियों की लिए हर माह पेन्शन शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री किसानों खासकर पाटीदारों को लेकर बहुत चिंतित है,पाटीदार समाज का असर मालवा और निमाड़ में निर्णायक है।
मंदसौर के किसान आंदोलन का विस्तार पूरे मालवा और निमाड़ में दिखाई दे रहा है। भारतीय किसान संघ और भाजपा किसान मोर्चे के बीच मतभेद बहुत गहरे हो गए है।
दोनो के नेता एक दूसरे को किसान असंतोष का जिम्मेदार ठहराते है।
दलित,आदिवासी,किसान और अन्य पिछड़ा वर्ग शिवराज की सोशल इंजीनियरिंग के फ़ोकस में है।
पदौन्नति में आरक्षण का समर्थन कर शिवराज दलित राजनीति को साधने में सफल रहे है।
उच्च वर्ग में पंडे-पुजारीयों को मन्दिर की जमीन का हक़ देने की घोषणा के कारण शिवराज को गांव-गांव में पुजारियों का समर्थन मिल रहा है।
बहरहाल शिवराज इतिहास रचना चाहते है। अपने नेतृत्व को भाजपा की चौथी बार सरकार बनाकर वे प्रदेश की राजनीति में अपरिहार्य बनने की चाहत रखते है।
प्रदेश की राजनीति में ऐसी हैसियत किसी को भी प्राप्त नही हुई है।
शिवराज खुशकिस्मत है कि 15 साल के शासन के बाद भी सरकार विरोधी लहर नही बन पाई है। उनकी छवि भी लोकप्रिय बनी हुईं है,उनकी अपील असरदार है।
दार्शनिक शिवराज की सोशल इंजीनियरिंग कांग्रेस के सत्ता अभियान में कितने अवरोध पैदा करती है यह देखना अभी बाकी है।

प्रकाश त्रिवेदी@samacharline.com