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नगर निगम में लाखों रूपये के वाहन हो रहे कबाड़ में तब्दील निगम का पिछवाड़ा बना भंगार घर

नगर निगम में लाखों रूपये के वाहन हो रहे कबाड़ में तब्दील
निगम का पिछवाड़ा बना भंगार घर
देवास। नगर निगम स्वच्छ हो इसको लेकर शहर के चारों और इस संदेश को फैला कर शहर स्वच्छ हो हमारा शहर की तर्ज पर कार्य कर रही है। इसी के तहत कहा जाए तो सबसे पहले घर साफ हो तो बाहर की सफाई की जाए, तो स्वच्छता की बात ठीक लगती है। शहर को स्वच्छ बनाने की कवायद को लेकर एक और जहाँ रात्रिकालीन सफाई, जगह-जगह डस्टबिन,कचरा गाड़ी,सुखा कचरा,गीला कचरा,वॉल पेन्टीग,फ्लेक्स बोर्ड व तरह तरह के स्लोगन के साथ शहर में स्वच्छता को लेकर कार्य तीव्र गति से संचालित हो रहा है। किंतु निगम परिसर में कचरे का अम्बार लगा हुआ है वही निगम की स्वच्छता की गाडिय़ों में कुडा कचरा भंगार की तरह अपनी दशा पर रो रहा है।
नगर निगम की आर्थिक स्थिति सुधारने को लेकर जहॉ निगम के अधिकारी और परिषद के सदस्य केवल चर्चाएं करते है और आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कोई भी निगम परिसर में ही ध्यान नहीं देते इसका ताजा उदाहरण निगम कार्यालय में पड़े करोड़ो के वाहन सड़ रहे है और उनकी तरफ देखने की भी किसी को फुर्सत नहीं है। निगम कार्यालय में निगम के सरकारी वाहन जहॉ खड़े रहते है वहॉ पर नगर निगम के कचरा वाहन जो की स्वच्छ भारत मिशन के तहत खरीदे गये कचरा एकत्रित के वाहन एमपी 41 जीए 0714,एमपी 41 जीए 0717,एमपी 41 जीए 0716,एमपी 41 एलए 0193 के चार वाहन के साथ ही करीब आधा दर्जन मैजिक वाहन जो की कचरा एकत्रित करने के लिये डोर टू डोर शहर में घूमते है इन वाहनो में खराबी के कारण यह महीनो से यही भंगार में पड़े हुए है। जो निगम परिसर में स्वच्छता की शोभा बढ़ा रहे है। वही कुछ समय पहले ही निगम द्वारा दस नये वाहन खरीदे गए मगर पुराने वाहनो की तरफ ध्यान तक देना उचित नहीं समझा। इन वाहनो को प्रेरणा संस्था को जब सुपूर्द किया गया था और जब वापस लिये गये तो कई वाहन मेंटेनेंस कराये बगैर निगम ने अपने सुपूर्द ले लिए और यह काम के अभाव में यू हीरखे रखे भंगार होने लगे है। यही नहीं परिसर में एक आयसर वाहन क्रमांक एमपी 13 ई 1539 के साथ ही जेसीबी मशीन के साथ,ट्रेक्टर ट्रालिया के साथ पूर्व महापौर की एम्बेसेडर कार क्रमांक एमपी 41 सीए 1111 जहॉ सड़ रही है वहीं डॉक्टर नजमा हेतुल्ला राज्यसभा सदस्य द्वारा दिया गया एक पानी का टेंकर भी आज तक वही खड़ा हुआ है। इन वाहनो को समय पर मेंटेनेंस करा लिया जाता तो जो किराये के वाहनो पर लाखो रूपये दिये जा रहे है वह निगम की आय को रोक सकते थे। यही नहीं जिलाधीश द्वारा दिये गये दो डंपर भी कई दिनो से निगम परिसर में पड़े पड़ जग लगने की स्थिाित में आ गए है। इसी के साथ सभापति अंसार एहमद द्वारा निगम का ड्रायवर वापस बुला लेने पर नाराज होने के बाद से ही निगम का अनुबंधित वाहन जिसका प्रतिमाह निगम 20 हजार रूपये से अधिक किराया दिया जा रहा है वह भी धूल खाने से सडऩे की कगार पर आ सकता है। जबकि वह निगम में उस वाहन को वापस बुलाने के लिये लिखकर भी दे चुके है फिर भी ठेकेदार को निगम के अधिकारियो ने वाहन वापस लेने के लिये आदेशित नहीं किया और लाखो रूपये के किराये की निगम को चपत लगी।

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