देशप्रकाश त्रिवेदी की कलम सेमध्य प्रदेश

भाजपा के चुनाव प्रबंधन पर संघ ने उठाए सवाल।

उज्जैन। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की उज्जैन में हई लंबी मुलाकात को लेकर अनेक कयास लगाए जाते रहे है। इस मुलाकात को मध्यप्रदेश में कैलाश विजयवर्गीय की वापसी से भी जोड़ा गया। जिसका मुख्यमंत्री शिवराजसिंह और कैलाश विजयवर्गीय दोनो ने खंडन किया।
अब छनकर आ रही खबरों के अनुसार संघ प्रमुख ने भाजपा अध्यक्ष को गुजरात भाजपा मे होने वाले संभावित असंतोष से आगाह किया और कांग्रेस मुक्त भारत को लेकर भाजपा के चुनाव प्रबंधन पर सवाल खड़े किए।
संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में भाजपा को लेकर जो फीडबैक प्राप्त हुआ उसे लेकर संघ की चिंताएं गहरा गई। गुजरात मे पन्ना प्रमुख की रणनीति धराशाई हो गई। विस्तारक योजना सुविधाओं में डूबकर दम तोड़ गई। यदि ऐन वक्त पर संघ शहरों में सक्रिय नही होता तो परिणाम उलट सकता था।
संघ ने भाजपा के लकदक चुनाव प्रबंधन पर भी एतराज जताया। फाईव स्टार कल्चर में और जरूरत से ज्यादा तकनीकी पर आश्रित होने से भी भाजपा को नुकसान हुआ। भाजपा का आम कार्यकर्ता जो वोट दिलाता है उसने खुद को उपेक्षित महसूस किया।
संघ ने बैठक में आए भाजपा के प्रतिनिधि राम माधव और संगठन महामंत्री रामलाल से कांग्रेस मुक्त भारत का फार्मूला जानना चाहा तो दोनों निरूत्तर हो गए। संघ के फीडबैक के अनुसार कांग्रेस का वोट बढ़ रहा है। संघ की सबसे बड़ी चिंता भाजपा के वोट प्रतिशत में वांछित बढ़ोतरी न होना है।
जब भाजपा के प्रतिनिधि जबाब नही दे पाए तो तत्काल भाजपा अध्यक्ष को तलब किया गया। संघ प्रमुख ने सर कार्यवाह भैया जी जोशी और भाजपा संघ का समन्वय देख रहे डॉ. कृष्णगोपाल की उपस्थिति में अमित शाह को भाजपा चुनाव प्रबंधन की हक़ीक़त का आकड़ो में आईना दिखाया।
अनापशनाप खर्च करने के बाद भी न तो वोट प्रतिशत बढ़ रहा है और न ही भाजपा संगठन संघ कैडर के अनुरूप मजबूत हो रहा है।
संघ भाजपा में भेजे गए पूर्णकालिक संगठनमंत्रियों के कामकाज से भी नाखुश है। संगठन मंत्री सिस्टम को ठीक करने के लिए डॉ.कृष्ण गोपाल से कहा गया है।
संघ भाजपा की चुनावी सफलता से चमत्कृत नही है उसे वोट का आधार बढ़ाने और संगठन मजबूत करने की चिंता है। यदि यह नही हुआ तो मिशन 2019 बहुत ही मुश्किल होगा।
2019 में एकजुट विपक्ष और सरकार के प्रति ऐन्टीइनकंबेंसी सबसे बड़ी चुनोती होगी।
बहरहाल मार्च में नागपुर में होने वाली संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में भाजपा को लेकर कठोर निर्णय लिए जाने के संकेत है। इस दौरान मोदी-अमित शाह की जोड़ी को भी आत्मवलोकन का अवसर रहेगा।

प्रकाश त्रिवेदी@samacharline.com