देशप्रकाश त्रिवेदी की कलम से

यूपी चुनाव-भाजपा कल्याण सिंह फार्मूले के भरोसे। कांग्रेस में गठबंधन को लेकर गहरी नाराजगी।

लखनऊ। भाजपा उत्तरप्रदेश में ‘कल्याण सिंह” फार्मूले पर चुनाव लड़ने जा रही है। गैर यादव,गैर जाटव मतों को अपने साथ लाने के लिए भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री और अभी राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के वोट जुगाड़ू फार्मूले पर फोकस किया है। इधर कांग्रेस कार्यकर्ताओ में सपा के साथ गठबंधन को लेकर नाराजगी और बैचेनी है।
गौरतलब है कि कांग्रेस और सपा का गठबंधन सीटों के बंटवारे को लेकर उलझा हुआ है। कांग्रेस रायबरेली और अमेठी की सभी सीटे चाहती है। झगड़ा यही से शुरू हुआ है। अखिलेश यादव कांग्रेस की बात मानने को तैयार है लेकिन मुलायम अमेठी से अपने खास गायत्री प्रजापत के लिए अड़े है। इस तरह के विवाद अनेक सीटों पर है।
भाजपा को विश्वास है कि कल्याण सिंह फार्मूले पर चलकर उसकी सरकार बन जाएंगी। इस फार्मूले के अलावा संघ के सर्वे के हिसाब से उन सीटों को भी फोकस किया गया है जहाँ भाजपा के पास मजबूत उम्मीदवार नहीं है। इन सीटों पर पार्टी ने विभिन्न दलों से आए नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव अनुसूचित जाति को अपने साथ लाकर भाजपा मजबूत स्थिति में आ गयी है।
कांग्रेस के जमीनी नेताओं का मानना है कि पार्टी को अपने बूते ही लड़ना था। यदि गठबंधन ही करना था तो फिर प्रशांत किशोर को क्यों लाया गया। क्यों किसान यात्रा,परिवर्तन यात्रा की नॉटंकी की गई।
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी की यात्रा और प्रशांत किशोर की रणनीति से आम कांग्रेसी कार्यकर्त्ता उत्साह से चुनाव में लग गया था। अब सपा से गठबंधन के बाद उसे कुठाराघात महसूस हो रहा है। जानकार इसे एक बार फिर यूपी में आत्मघाती कदम मान रहे है।
बहरहाल भाजपा को कल्याण सिंह फार्मूले पर भरोसा है इसिलए उन्हें तव्वजो मिल रही है उनके पोते को अतरौली से टिकट दिया गया है।
कांग्रेस अखिलेश के भरोसे हो गई है। देखते है सायकल पर बैठकर वह कहा तक जा पाती है।

प्रकाश त्रिवेदी@samacharline