प्रकाश त्रिवेदी की कलम सेमध्य प्रदेश

राहुल जी मध्यप्रदेश कांग्रेस को ऑपरेशन की जरुरत है।

धीरे धीरे दम तोड़ रही मध्यप्रदेश कांग्रेस को राजनितिक शल्यक्रिया की जरुरत है। भले ही कांग्रेस का वोट बचा हुआ है या तीन नगरीय निकायों में जीत की खुराक मिल गयी है,फिर भी पार्टी अपना जनाधार प्राप्त नहीं कर पा रही है।

कांग्रेस को अंदर से जानने वाले प्रेक्षक बताते है कि जनमानस में कांग्रेस को लेकर नकारात्मक भाव कम नहीं हो रहा है। कांग्रेस नेतृत्व के प्रति विश्वास जम नहीं रहा है।
दिग्विजय सिंह के समय से उपजी नकारात्मकता को सुभाष यादव,सुरेश पचौरी, और अब अरुण यादव बदल नहीं सके है। धीरे धीरे यह भाव बढ़ता जा रहा है।
पार्टी के लिए राहत इस बात की है कि प्रदेश में तीसरा दल मताधार नहीं बना पाया है अन्यथा कांग्रेस का हाल यहाँ भी उत्तरप्रदेश जैसा हो सकता था।
13 साल में पार्टी मुखर विपक्ष की भूमिका भी ठीक से नहीं निभा पायी है। विधानसभा में और भी लचर स्थिति है।
पार्टी अब तक स्थाई नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पायी है। बाला बच्चन ने कार्यवाहक भूमिका में अपनी छाप छोड़ी है लेकिन पार्टी का स्थानीय समीकरण उनको आगे बढ़ाने में संकोच कर रहा है।
युवा कांग्रेस कुणाल चौधरी के नेतृत्व में सक्रिय जरूर है पर उनपर लगी दिग्विजय सिंह की छांप के कारण वे सशक्त टीम नहीं बना पा रहे है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस बीमार है। वैचारिक लकवे से पीड़ित है,राजनीतिक प्रबंधन का आभाव है,विश्वसनीय चेहरों की कमी है,लीडरशिप का जनाधार नहीं है,कांग्रेस के जो दमदार और जनाधार वाले नेता है उनकी पूछ परख नहीं है।
गौरतलब है कि पार्टी का वोट है,नेता है,कार्यकर्त्ता है,पर जनमानस में विश्वास पैदा कर सके ऐसा नेता नहीं है।
राहुल जी मध्यप्रदेश कांग्रेस को शाल्यक्रिया(ऑपरेशन) की आवश्यकता है।
प्रकाश त्रिवेदी@samacharline