देशप्रकाश त्रिवेदी की कलम से

सौ फीसदी राजनेता है देवेंद्र फडणवीस।

मुम्बई।
मन,वचन,कर्म से आचार में व्यवहार में पूरी तरह “राजपुरुष” है महाराष्ट्र के दूरदर्शी मुख्यमंत्री *देवेंद्र गंगाधर राव फड़नवीस*। चंद्रपुर जिले के मूल गांव से उनका पुश्तेनी ताल्लुक है। उनके पूर्वजो को शिवाजी महाराज ने फड़नवीस की उपाधि दी,और उन्हें जागीर प्रदान की।
आज देवेंद्र भाऊ का जन्मदिवस है। 22 जुलाई 1970 को नागपुर में जन्मे देवेंद्र फड़नवीस को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता गंगाधर राव फड़नवीस जनसंघ के विधायक थे।
विदर्भ क्षेत्र में जनसंघ के कर्ताधर्ता वे ही थे। उनके सानिध्य में ही नितिन गडकरी जैसे नेता पल्लवित हुए है।
सरस्वती विद्यालय में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर देवेंद्र भाऊ ने वकालत की पढ़ाई की।
छात्र जीवन से ही संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहकर राजनीति का ककहरा सीखा। पिता से नेतृत्व के गुण तो खून में ही थे, जमीनी राजनीति नागपुर महानगरपालिका में नगर सेवक बनकर सीखी। 1992 से 1997 तक नगर सेवक रहे। 1997 के बाद नागपुर के महापौर बने।
नागपुर के महापौर रहते हुए देवेंद्र भाऊ ने शहरी विकास और स्वच्छता प्राथमिकता दी तथा नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली को नई परिभाषा दी।
2001 में नागपुर से पहलीं बार विधायक चुने गए। लगातार तीन बार विधायक रहने के साथ वे महाराष्ट्र भाजपा के सफल अध्यक्ष भी रहे है।
उनके नेतृत्व में ही भाजपा ने महाराष्ट्र में सत्ता हासिल की।
क्रिकेट और राजनीति सिर्फ दो ही रुचियां है भाऊ की। लज़ीज खाने के शौकीन है वे।

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उनके निकटवर्ती मित्र बताते है कि उन्हें पोहा बहुत पसंद है। रविवार को वे सिर्फ पोहा खाना ही पसंद करते है।
देवेंद्र भाऊ परिवार प्रेमी है। पत्नी अमृता और बिटिया के लिए वे तमाम व्यस्ताओं के बाद भी समय निकाल लेते है।
मुख्यमंत्री के रूप वे बेहद संजीदा,सरल और लोकप्रिय राजनेता है। प्रशासन में वे सख्त,कानून के दायरे में काम करने वाले और मितव्ययी प्रशासक है।
राजनीति में वे माहिर है। मितभाषी और गंभीर व्यक्तित्व के कारण वे अपने समकक्षों से थोड़ा अलग है। अपने पक्ष को मजबूती से रखना और उसे मनवा लेने में उन्हें महारत हासिल है।
कड़वी बात भी वे बड़ी सहजता से मीठे शब्दो मे कह जाते है। कुशल वार्ताकार होने के कारण ही वे महाराष्ट्र की राजनीति में अजेय बने हुए है और अपने गठबंधन सहयोगी शिवसेना पर बढ़त बनाए हुए है।
अपनी ईमानदार और विकास पुरूष की छवि के सहारे वे संघ और भाजपा के प्रिय है।
उनका चितपावन ब्राह्मण होना आज उनकी सबसे बड़ी ताकत है। जबकि महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा होना ही सफल नेता की पहचान माना जाता रहा है।
संघ के दुलारे,भाजपा के तारणहार,और महाराष्ट्र के लोकप्रिय मुख्यमंत्री देवेंद्र भाऊ को आज उनके जन्मदिवस पर अनन्त शुभकामनाएँ।

प्रकाश त्रिवेदी