यूपी में BJP का है जमाना तो सपा क्यों बन रही दलबदलुओं का सियासी ठिकाना?
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल अपने सियासी-सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने में जुटे...
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विदेशी संस्थाओं द्वारा भारत में लोकतांत्रिक स्थिति की आलोचना की गई है,...
फरवरी महीने में थोक मूल्य आधारित सूचकांक (WPI) बढ़कर 4.17 फीसदी पर...
बंगाल की चुनावी रेस में बीजेपी और टीएमसी एक दूसरे से एक...
कई कंपनियां कार्य को देखते हुए तीन अथवा छह महीने के लिए कर्मचारियों को अस्थाई तौर पर नियुक्त करती हैं। इन कर्मचारियों को रखने से कंपनियों को अपने स्थाई कर्मचारियों की तुलना में काफी कम वेतन देना होता है। इसके अलावा ऐसे कर्मचारियों को मेडिक्लेम या फिर अन्य तरह की सुविधाएं नहीं मिलती हैं। खासतौर पर मजदूरों को रोजना की दिहाड़ी पर रखा जाता है, जिनको बहुत कम पैसा मिलता है।