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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद...
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मेहगांव विधानसभा का भविष्य अर्जुन पुत्र अजय सिंह ‘राहुल’ के निर्णय पर मध्यप्रदेश की ग्वालियर चंबल संभाग की मेहगांव विधानसभा का भविष्य मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ‘राहुल’ की जिद पर आकर टिक गया है । कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार रहे चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी लगभग सात साल भाजपा में रहने के बाद इन दिनों कांग्रेस में हैं । सूत्रों के अनुसार कांग्रेस चौधरी राकेश को विधानसभा उपचुनाव में भिण्ड जिले की मेहगांव विधानसभा से उम्मीदवार बना सकती है । चौधरी की उम्मीदवारी पर अजय सिंह अड़गा लगाने का प्रयास कर रहे हैं । गौरतलब है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी और उपेक्षा से परेशान चौधरी राकेश सिंह ने उस वक्त कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा में शामिल हो गए जब विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ अविश्र्वास प्रस्ताव पेश कर रहे थे । नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इसे व्यक्तिगत अपमान के तौर पर ले लिया । लड़ाई संसदीय ज्ञान और सरकार को घेरने के मुद्दों को लेकर थी । चौधरी राकेश सिंह संसदीय ज्ञान और राजनीतिक समझ के अच्छे जानकार होने के साथ-साथ प्रखर वक्ता के तौर पर जाने जाते हैं । वे उस समय विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हुआ करते थे । मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर थी और कांग्रेस जबरदस्त तरीके से कमजोर । राजनैतिक लड़ाई व्यक्तिगत लड़ाई में बदल गई है । चौधरी राकेश को टिकट देने पर अजय सिंह कांग्रेस छोड़ने की धमकी दे रहे हैं । पार्टी की बैठक में अजय सिंह का कहना रहा कि वे दलबदलूओं को टिकट देने के खिलाफ है । पार्टी में अजय सिंह राहुल के विरोधियों का कहना है कि अजय सिंह पहले उस इतिहास को खंगाले जब राजनैतिक कारणों को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय अर्जुन सिंह कांग्रेस छोड़कर चले गए थे और जब उन्हें कांग्रेस में अनुकूल वातावरण दिखाई दिया तो वे वापस कांग्रेस में शामिल हो गए । उस समय भी कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने स्वर्गीय अर्जुन सिंह की कांग्रेस वापसी का विरोध किया था लेकिन आलाकमान के निर्णय के बाद सबने राजनैतिक विरोध के बावजूद उस निर्णय का स्वागत किया । अजय सिंह को पार्टी नेतृत्व को धमकी देने की बजाय एकजुटता के लिए काम करना चाहिए ।
उक्त नेता का कहना है कि मध्यप्रदेश में लंबे अरसे तक ठाकुर ब्राम्हण की राजनैतिक लड़ाई का असर चंबल में भी पड़ता रहा है ।जिसका बड़ा खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा है । ज्यादा बेहतर होगा कि पार्टी के सभी वर्गों के नेता आपसी असहमति और मतभेद भुलाकर काम करें।