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एक स्टडी के बाद कहा जा रहा है कि चीन में कोरोना वायरस शायद पिछले साल की गर्मियों में ही आ गया था. इस थ्योरी के पीछे दो प्रमुख वजह बताई गई हैं. 1. सैटेलाइट डेटा से पता चला कि वुहान के पांच प्रमुख हॉस्पिटल के पास 2019 की गर्मियों में ट्रैफिक काफी बढ़ गया था. 2. इंटरनेट सर्च में काफी लोग कोरोना के लक्षण वाले कीवर्ड सर्च कर रहे थे, जैसे cough, diarrhoea वगैरह. और ये दोनों घटना एक ही वक्त में हो रही थीं.
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉ. जॉन ब्राउनस्टीन के नेतृत्व में कॉमर्शियल सैटेलाइट डेटा से जुटाई गई जानकारी के आधार पर स्टडी की गई. जॉन की टीम को पता चला कि वुहान के प्रमुख अस्पतालों के पास गर्मियों के दौरान ही भीड़ बढ़ने लगी थी.
स्टडी में कहा गया है कि 2018 से 2019 के बीच वुहान के कई हॉस्पिटल के पास ट्रैफिक में 90 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई. स्टडी में दावा किया गया है कि उस वक्त में ‘वुहान में जरूर कुछ चल रहा था’. ABC News की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉन ब्राउनस्टीन ने कहा कि ट्रैफिक में बढ़ोतरी और इंटरनेट पर कोरोना के लक्षण से जुड़े कीवर्ड सर्च में इजाफा एक साथ देखने को मिला.
कई देश चीन पर ये आरोप लगाते हैं कि उसने कोरोना से जुड़ी जानकारी छिपाई. आधिकारिक तौर से चीन ने 31 दिसंबर 2019 से पहले WHO को वायरस के बारे में जानकारी नहीं दी थी. वहीं, अमेरिका के खुफिया विभाग ने कहा था कि वुहान में नवंबर में ही कोरोना वायरस के मामले सामने आ गए थे.
जॉन ब्राउनस्टीन ने बताया कि 10 अक्टूबर 2019 को वुहान के तिआनयोऊ हॉस्पिटल के पास 285 कार पार्क की गई थीं. 2018 के इसी दिन के आंकड़े से ये 67 फीसदी अधिक थे. कुछ हॉस्पिटल के पास ये आंकड़ा 90 फीसदी अधिक था.