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देवास। जिले की हाटपीपल्या विधानसभा उपचुनाव कई मायनों में बेहद खास हो गए है। कोरोना संकट के बीच हो रहे इस चुनाव में मतदाताओं ने खामोशी की चादर औढ़ रखी है। कोई उत्साह, उमंग पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी नजर नहीं आ रहा है। मुद्दों की बात करे तो कांग्रेस किसान कर्जमाफी और अपने साथ किए गए धोखे को आधार बनाकर आगे बढ़ रही है, वहीं भाजपा कमलनाथ सरकार के खोखले वादे जनता को याद दिला रही है। ये चुनाव दोनों दलों के कई नेताओं का भविष्य भी तय करेंगे। देवास विधायक गायत्री राजे पवार इस चुनाव की प्रमुख रणनीतिकार है। अगर भाजपा ये चुनाव जीत जाती है तो पार्टी की विजय का सेहरा उनके सिर पर ही बंधेगा, जीत के बाद उन्हें सरकार में मंत्री पद भी मिल सकता है, वहीं दीपक जोशी की राजनीति भाजपा की जीत के साथ ही खत्म हो सकती है, वे पूरी तरह नैपथ्य में चले जाएंगे। लेकिन अगर उल्टा हुआ और भाजपा हार गई तो इससे राजघराने के पैलेस की राजनीति को भी गहरा धक्का लगेगा। इस चुनाव से ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी विशेष सम्मान जुड़ा है। वही सुनने में यह भी आ रहा है कि महाराज ने महाराज को इशारो ही इशारो में कई संकेत दे दिये है। इधर कांग्रेस की बात करे तो पूरी चुनाव रणनीति सज्जन सिंह वर्मा के आसपास चल रही है। कमलनाथ सरकार में वर्मा का कद बेहद मजबूत हुआ है। अगर कांग्रेस हारी तो उनका सूरज भी डूब जाएगा। कांग्रेस ने अधिकांश समय इस सीट पर राजेंद्र सिंह बघेल को ही अपना उम्मीदवार बनाया है। बढ़ती उम्र के बाद इस बार उनका बेटा राजवीर सिंह बघेल मैदान में है। अगर राजवीर ये चुनाव हारे तो परिवार की राजनीतिक विरासत पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इधर भाजपा से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लडने का मन बना बैठे तेजसिंह सेंधव को पैलेस साधने में लगा है पर अब देखना यह है कि नामांकन भरने से पहले क्या होता है वही वर्तमान समय में हाटपीपल्या विधानसभा चुनाव में दोनों ही दल किसानों की बात कर रहे है, इस चुनाव का परिणाम भी वे ही तय करेंगे.. फिलहाल वे रबी की तैयारी में लगे है। रबी फसल की बोवनी के साथ ही वे किसी एक उम्मीदवार की किस्मत को लहलहा देंगे।