दुबई में ‘एआईएम कांग्रेस-2026’: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व बैंक के उपाध्यक्ष से की उच्च स्तरीय बैठक, प्रदेश में एआई परियोजनाओं के लिए फंडिंग पर चर्चा
दुबई/भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन...
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के UAE...

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के द्वारा शाम पांच बजे के बाद GDP के आंकड़े जारी किए जा सकते हैं. जीडीपी के अलावा आज 8 कोर सेक्टर के प्रदर्शन, विदेशी मुद्रा भंडार, बाह्य वाणिज्यिक उधार के आंकड़े भी आ सकते हैं.
सरकार आज शाम को इस वित्त वर्ष (2020-21) की दिसंबर में खत्म होने वाली तीसरी तिमाही के लिए जीडीपी के आंकड़े जारी करेगी. इन आंकड़ों को लोगों को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इससे पता चलेगा कि हमारी अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से बाहर निकली या नहीं.
आज कई आंकड़े आएंगे
जीडीपी के अलावा आज 8 कोर सेक्टर के प्रदर्शन, विदेशी मुद्रा भंडार, बाह्य वाणिज्यिक उधार यानी ईसीबी के आंकड़े भी आ सकते हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के द्वारा शाम पांच बजे के बाद GDP के आंकड़े जारी किए जा सकते हैं.
मंदी का दौर
गौरतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना की वजह से इतिहास में पहली बार तकनीकी रूप से मंदी के दौर में पहुंची है. जब कोई अर्थव्यवस्था लगातार दो तिमाही गिरावट में रहती है, तो यह मान लिया जाता है कि वह तकनीकी रूप से मंदी के दौर में पहुंच चुकी है.
कोरोना संकट की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर में है. इसकी वजह से ही इस वित्त वर्ष की जून में होने वाली पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 23.9 फीसदी की गिरावट आई. इसकी वजह यह थी कि उस दौरान देश में काफी सख्त लॉकडाउन लगा था और इकोनॉमी पूरी तरह से ठप थी.
इसके बाद फिर सितंबर की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट आई.
पॉजिटिव जीडीपी की उम्मीद
जानकार यह उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार यानी तीसरी तिमाही के आज के आंकड़े पॉजिटिव रह सकते हैं. जीडीपी या तो शून्य के आसपास रहेगी या इसमें कुछ बढ़त की उम्मीद की जा सकती है. यानी तीसरी तिमाही से अर्थव्यवस्था ऊंचाई की ओर बढ़नी शुरू हो सकती है, जो काफी राहत की बात होगी.
कई एजेंसियों और संस्थाओं ने यह उम्मीद जताई है कि तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्थापॉजिटिव जोन में जाएगी. भारतीय रिजर्व बैंक की दिसंबर में जारी ‘स्टेट ऑफ द इकोनॉमी’ बुलेटिन में कहा गया था कि ऐसे पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं कि अर्थव्यवस्था गहरी खाई से अब रोशनी की तरफ बढ़ रही है.