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रांची के नौ वर्षीय शौर्य को हंटर सिंड्रोम नाम की खतरनाक बीमारी है. इस बीमारी का कोई इलाज भी नहीं है और ना ही कोई रिसर्च अपने देश में हो रही है. इस बीमारी के इलाज़ के लिए करोड़ों का खर्च करना पड़ता है. अमेरिका की एक दवा शौर्य की सांसें थामे हुए है. अमेरिकी दवा का प्रति वर्ष दो करोड़ का खर्च है.
झारखंड के रांची में नौ वर्षीय मासूम ऐसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहा है, जिसका भारत में इलाज ही नहीं है. अमेरिकी कंपनी इस गंभीर बीमारी की दवा बनाती है, उसकी कीमत भी करोड़ों में हैं. मासूम बच्चे के पिता को जब इसकी जानकारी हुई, तो वह पूरी तरह टूट गया. आर्टिकल 21 के जीवन जीने के अधिकार के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें हेल्थ डिपार्टमेंट से जानकारी मिली कि केंद्र सरकार आगामी 31 मार्च को रेयर डिजीज पॉलिसी को लांच कर रही है.
रांची के रहने वाले सौरभ सिंह को जब अपने नौ वर्षीय बेटे शौर्य की इस गंभीर बीमारी के बारे में पता चला, तो वे बुरी तरह टूट गए. बताया गया कि दो वर्ष तक शौर्य ने आम बच्चों की तरह अपना बचपन व्यतीत किया, लेकिन फिर वो इस बीमारी की चपेट में आ गया. उसका सिर बढ़ने लगा. शौर्य के पिता ने देश के कई बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाए. बाद में गहन इलाज के बाद पता चला कि उसे हंटर सिंड्रोम नाम की खतरनाक बीमारी है.
एक ऐसी बीमारी जो लाइलाज है और भारत में तो इस पर रिसर्च भी नहीं हो रही है. उसके पिता सौरभ सिंह हैरान परेशान हो गए. बाद में पता चला कि अमेरिका की एक कंपनी इस बीमारी की दवा बनाती है, लेकिन उस दवा की कीमत करोड़ों में है. बेटे को बचाने के लिए इतनी बड़ी रकम कहां से लाएंगे, ये सोचकर वे पूरी तरह से टूट गए, लेकिन बेटे के जीवन के लिए उन्होंने हार नहीं मानी.
सौरभ सिंह ने अपने बेटे के इलाज में मदद के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री को चिट्ठी लिखी. बाद में आर्टिकल 21 के जीवन जीने के अधिकार के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इस बीच उन्होंने एक संस्था बनाकर जागरूकता फैलाई. अपने बच्चे के साथ साथ दूसरे बच्चों की जिंदगी बचाने का बीड़ा उठाया. काफी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्हें हेल्थ डिपार्टमेंट से जानकारी मिली कि केंद्र सरकार आगामी 31 मार्च को रेयर डिजीज पॉलिसी को लांच कर रही है.
बता दें कि शौर्य को हर हफ्ते अस्पताल में भर्ती कराकर इनफ्यूजन कराना पड़ता है, जिसे एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी कहा जाता है, ये काफी कष्टकारी होता है. इलाज का खर्च साल में दो करोड़ रुपए आता है. अब तक तो किसी भी तरह सौरभ ने अपने बेटे का इलाज करवाया, लेकिन भविष्य में सरकार के सहयोग के बिना ये संभव नहीं था. शौर्य की मां कहती है कि जब उन्हें पता चला की उनके बेटे को ऐसी खतरनाक बीमारी है तो उनका एक एक पल काटना मुश्किल हो गया. पीएम मोदी से उन्होंने अपील की थी कि वे रेयर डिजीज की एक ऐसी पॉलिसी बनाएं, जिससे इस बीमारी से पीड़ित बच्चे को उनकी जिंदगी मिल सके.
ये बोले स्वास्थ्य मंत्री
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार के द्वारा बनायी जा रही रेयर डिजीज पॉलिसी की सराहना की है. बन्ना गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार भी लाइलाज बीमारी के रोकथाम और उसको खत्म करने के लिए लगातार लगी हुई है. रांची के बच्चे शौर्य की सरकार हर संभव मदद करेगी.