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कोविड-19 के नाम पर सरकार ने सब कुछ किया,खूब बैठके की,वीसी की,मंत्रियों अफसरों के दौरे हुए,कोविड के नाम पर तमाम तरह के टच फ्री गेजेट्स खरीदे गए,खूब पब्लिसिटी की,इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को खूब काम मिला।

बस ऑक्सीजन,बेड और वेंटिलेटर का इंतजाम नही कर पाए।

क्यो? शायद इसमें कमीशन कम मिलता है। अफसरों ने फेस रीडिंग कैमरे तक खरीदे जो सामने आने पर व्यक्ति का तापमान बताते है। टॉयलेट के लिए गंदगी को मॉनिटर करने वाले उपकरण खरीदे।

पर दूसरी लहर की चेतावनी के बाद भी जरूरी दवाईयां नही खरीदी। इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित नही की।

हाँ टनों सेनेटाइजर खरीदा,करोड़ो मास्क,पीपीई किट और हैंड ग्लोब्स खूब खरीदे। इतनी खरीदी के बाद भी सेनेटाइजर और मास्क की स्वास्थ्य विभाग में कमी है। सेनेटाइजर मशीने ख़रीदी पर ऑक्सीजन सिलेंडर, उसकी रिफिलिंग और हवा से ऑक्सीजन बनाने वाली मशीनें खरीदना भूल गए।

कोविड के नाम पर खूब ट्रेनिंग हुई,जनजागरण हुआ पर हम डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को कोविड 19 के तय प्रोटोकॉल के हिसाब से तैयार नही कर पाए।

परिणामस्वरूप आज हमारे पास कोविड मरीजों के प्रबंधन की सबसे बड़ी समस्या है। किसे भर्ती करना है,किसे होम आइसोलेशन में रखना है। कितने प्रतिशत फेफड़े संक्रमण पर क्या ईलाज होना चाहिए,कब ऑक्सीजन की जरूरत है,कब रेमेडेसीवर की जरूरत है,कब तोशी लगेगा,कब फेबफ्लु चाहिए।

हम न लोगो को समझा पाए न कमीशन खोर डॉक्टरों को।

कलयुग के भगवान कब शैतान बन गए पता ही नही चला।

सारी डॉक्टर बिरादरी ऐसी नही है अनेको ने अपना जीवनदान भी दिया है। कई बहुत सलीके से कम खर्च में उम्दा ईलाज़ कर रहे है। ऐसे देवतुल्य डॉक्टरों को सेल्यूट करने को मन करता है।

निजी अस्पतालों की लूट पर कई वेबसिरिज बनने की तैयारी हो रही है। इन अस्पतालों ने पिछले लॉकडाउन का घाटा भी मय चक्रवती ब्याज वसूल कर लिया है।
और हेल्थ बीमा कंपनियों भी बेईमानी कर रही है। केसलेस ईलाज नही मिल रहा है,क्लेम सेटल नही हो रहे है। जब प्रीमियम लेनी थी तब एजेंट सब जिम्मेदारी ले रहा था,अब सारा दोष कंपनी पर मड़ रहा है। हर हाल में पीड़ित परेशान है,कोविड मरीज को उचित स्वास्थ्य प्रबंधन नही मिल रहा है,परिजन परेशान घूम रहे है।

सरकार और जनप्रतिनिधियों की बयानबाजी जारी है। कुछ लोग है जो चुपचाप सेवा कर रहे है।आरएसएस के स्वयंसेवक, कुछ जनप्रतिनिधि,समाजसेवी और मीडिया के लोग जान लगाकर काम कर रहे हैं। शासन का इक़बाल दिख नही रहा हैं, प्रशासन की टीम जी जान से लगी पर स्वास्थ्य विभाग के नकारा जिम्मेदार सब पर पानी फेर रहे है। इन नाकारा लोगो के कारण महीनों से सेवा कर रहा पैरामेडिकल स्टाफ, अपनी ड्यूटी ईमानदारी से कर रहे डॉक्टर भी शर्मिंदगी उठा रहे है। कोविड 19 महामारी है आपदा है लेकिन आपदा में अवसर तलाशने और उसे भुनाने वाले भी कम नही है। बहरहाल किंकर्तव्यविमूढ़ नेतृत्व और नकारा स्वास्थ्य अधिकारियों को झेलना हमारी त्रासदी है। देखते है यह दुर्भाग्य कब तक हमारे साथ रहता है।

घर मे रहिए,मास्क पहनिए,6 फुट की दूरी राखिए और सुबह-रात्रि गर्म पानी पीजिए,काढ़ा लेते रहे,फेफड़े को मजबूत करने के लिए व्ययाम भी करे।

बाबा महाकाल सब अच्छा करेंगे।

प्रकाश त्रिवेदी
संपादक
samacharline.com
Ujjain-Bhopal