वापस नहीं आए कोरोना संकट में गांव गए लाखों वर्कर, सूरत के डायमंड उद्योग में श्रमिकों की भारी किल्लत - Samacharline.com
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वापस नहीं आए कोरोना संकट में गांव गए लाखों वर्कर, सूरत के डायमंड उद्योग में श्रमिकों की भारी किल्लत

Gujarat Surat diamond industry: कोरोना काल के बाद दुनियाभर में डायमंड की मांग बढ़ी है, मगर ऐसे समय में सूरत की डायमंड फैक्टरियों में श्रमिकों की 25 फीसदी की भारी कमी हो गई है.

देश में एक तरफ बेरोजगारी बड़ा मसला है, तो दूसरी तरफ गुजरात के सूरत का हाल यह है कि यहां की डायमंड इंडस्ट्री (Gujarat Surat diamond industry) श्रमिकों की भारी किल्लत से जूझ रही है. कोरोना की पहली लहर के वक्त पलायन कर गए डायमंड उद्योग के लाखों वर्कर अब तक वापस नही लौटे हैं.

गौरतलब है कि दुनिया में औसतन हर 15 से डायमंड में से 14 डायमंड गुजरात के सूरत के कारखानों में तराशे जाते हैं. सूरत डायमंड कारखानों में तैयार होने वाले डायमंड देश और दुनिया भर के अलग-अलग इलाक़ों में भेजे जाते हैं.

डायमंड का हब है सूरत 

पूरे गुजरात में करीब एक करोड़ लोग अप्रत्यक्ष रूप से डायमंड के कारोबार से जुड़े है जबकि 15 से 16 लाख लोग सीधे डायमंड उद्योग से जुड़े है. सूरत शहर डायमंड का हब है यहां के कारखानों में रफ डायमंड तराश कर चमकाए जाते हैं. लेकिन आज हालत यह है कि सूरत का डायमंड उद्योग श्रमिकों की भारी किल्लत से जूझ रहा है.

प्रोडक्शन में भारी कमी

कोरोना काल के पहले चरण में ही शहर छोड़ कर गए डायमंड कंपनियों के श्रमिक अब तक वापस नही लौटे है जिसकी वजह से प्रोडक्शन में भारी कमी आई है.

सूरत के डायमंड उद्योगपति, सूरत डायमंड एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट और जेम्स ऐंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के रिजनल चेयरमैन दिनेश भाई नावडिया का कहना है कि कोरोना काल के बाद दुनियाभर में डायमंड की मांग बढ़ी है, मगर ऐसे समय में सूरत की डायमंड फैक्टरियों में श्रमिकों की 25 फीसदी की कमी हो गई है.

सूरत की फैक्टरियों में काम करने वाले न सिर्फ़ गुजरात के अलग-अलग इलाक़ों के श्रमिक बल्कि अन्य राज्यों के श्रमिक भी वापस नही लौटे हैं. ऐसे में श्रमिकों को वापस लाने के लिए और नए श्रमिकों को तैयार करने के लिए डायमंड उद्योग के संगठन काफी मशक्कत कर रहे हैं.

मनरेगा भी एक वजह 

यह कहा जा रहा है कि जो श्रमिक लॉकडाउन के वक्त अपने गांव गए थे उन्हें वहां उनके राज्यों में ही सरकार की मनरेगा योजना के तहत काम मिल जा रहा है. कुछ श्रमिक तीसरी लहर आने की आशंका को देखते हुए सूरत नही लौटना चाह रहे हैं.

श्रमिकों को वापस लाने के लिए सूरत के डायमंड उद्योग से जुड़े संगठन डायमंड कारखानों के मालिकों को वेतन बढ़ाने और अन्य सुविधाएं देने की मांग कर रहे हैं.