Mumbai’s Redevelopment Revolution, Why India is Next -Isheta Boruah, Aditya Trivedi
Mumbai is being Rebuilt. India is...
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दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में एम्स निदेशक ने कहा कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका नहीं है. उन्होंने कहा कि धीरे—धीरे यह महामारी स्थानीय होती चली जाएगी. आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा कि अभी महामारी खत्म नहीं हुई, इसलिए एहतियात बरतें और कोरोना वैक्सीन जरूर लगवाएं.
भारत में कोरोना की पहली और दूसरी के बाद अब तीसरी लहर आने की आशंका नहीं है. इस समय कोरोना मामले पहले की तरह नहीं आ रहे हैं. इससे स्पष्ट है कि टीके वैक्सीन वायरस से बचा रहे हैं. फिलहाल हमारे यहां वैक्सीन के बूस्टर डोज की कोई आवश्यकता नहीं है. यह बातें एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहीं. उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ—साथ यह महामारी स्थानीय हो जाएगी.
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव द्वारा लिखित पुस्तक “गोइंग वायरल: मेकिंग ऑफ कोवैक्सिन – द इनसाइड स्टोरी” के विमोचन के मौके पर डॉ. गुलेरिया ने कहा कि देश में वैक्सीनेशन के बाद कोरोना के मामले तेजी से घटे हैं. लोगों को अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत भी नहीं आई. उन्होंने कहा कि जैसे—जैसे समय बीत रहा है, कोरोना की किसी भी लहर की आशंका कम हो रही है.
उन्होंने कहा कि यह कोई संभावना नहीं है कि पहली और दूसरी की तुलना में COVID-19 की तीसरी लहर भारत में आएगी. समय के साथ महामारी स्थानीय होती चली जाएगी. हमारे बीच मामले सामने आते रहेंगे, लेकिन इनमें गंभीरता बहुत कम हो जाएगी.
वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत पर उन्होंने कहा कि इस समय ऐसे मामलों में कोई वृद्धि नहीं हुई है. इससे स्पष्ट है कि टीके अभी भी कोरोना वायरस से बचाव कर रहे हैं. इसलिए अभी वैक्सीन के बूस्टर डोज या तीसरे डोज की कोई आवश्यकता नहीं है.
नीति आयोग के सदस्य बोले— महामारी खत्म नहीं हुई है, वैक्सीन जरूर लगवा लें
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि तीसरी डोज का फैसला विज्ञान पर आधारित होना चाहिए. बूस्टर डोज पर अध्ययन किया जा रहा है. हम डेटा और रिसर्च के माध्यम से समझने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, भारत की वयस्क आबादी के लिए दूसरी डोज लगना बेहद जरूरी है. जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है, उन्हें इसे प्राथमिकता के आधार पर लगवाना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि महामारी खत्म नहीं हुई है. इसे भविष्य में बिल्कुल खत्म न समझा जाए. यह एक स्थानीय स्तर तक पहुंच सकती है. पॉल ने कहा कि अगर वायरस अपना रूप बदलता है तो हमारी सारी तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से हम स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के मामले में बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन हम अपनी सुरक्षा कम करने का जोखिम नहीं उठा सकते. कोविड के नियमों का पालन करना जारी रखना चाहिए.
महामारी से मजबूत सिस्टम बनाने की मिली सीख
रूपा प्रकाशन से प्रकाशित अपनी पुस्तक के बारे में विस्तार से बात करते हुए आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि COVID-19 के खिलाफ बूस्टर डोज की जरूरत के लिए अब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में वैज्ञानिकों, सरकार और लोगों के काम में स्पष्टता और ईमानदारी रही है. उन्होंने कहा कि लोगों और सरकार के लिए महामारी से सीख मिली है, जिसमें स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना और एक मजबूत सिस्टम तैयार करना शामिल है. हमें दुनिया में वायरसों से सावधान रहना होगा.
भार्गव ने कहा, मीडिया की भूमिका यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण थी कि वायरस और वैक्सीन के बारे में रिपोर्टिंग ईमानदारी और मेहनत से की गई. यह तय करता है कि लोगों को टीके के प्रति कोई झिझक न हो. “गोइंग वायरल” उन वैज्ञानिकों के प्रत्यक्ष अनुभवों को दर्शाता है, जिन्होंने आठ महीने से भी कम समय में भारत की पहली स्वदेशी COVID-19 वैक्सीन विकसित करने के लिए चौबीसों घंटे काम किया.
अपनी पुस्तक में, भार्गव ने कोवैक्सीन के निर्माण के पीछे कुछ कम-ज्ञात तथ्यों को भी सामने रखा है, जिसमें नए तरीके शामिल हैं, जिसमें वैज्ञानिकों ने भारत में एक सख्त राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को नेविगेट किया. एक अन्य उपाख्यान में, लेखक ने यह तय करने में 20 बंदरों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला है कि देश भर में लाखों भारतीयों की इस जीवन रक्षक टीके तक पहुंच है.
भारत ने आत्मनिर्भर होकर दिखाई मजबूती
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सचिव राजेश भूषण ने कहा कि भारत ने COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में बहुत लंबा सफर तय किया है. महामारी की शुरुआत के बाद से, हम सक्रिय रूप से COVID-19 RNA निष्कर्षण, टेस्ट किट तैयार करने और वैक्सीन बनाने में शामिल रहे हैं. प्रभावी सहयोग, मजबूत नेतृत्व और कुशल टीम वर्क ने इसे संभव बनाया है. भारत ने आत्मनिर्भर होकर बाधाओं से लड़ने और वैश्विक स्तर पर खड़ा होने के लिए अपनी ताकत दिखाई. वहीं सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कहा कि भारत बायोटेक के साथ ICMR की साझेदारी बेहतर रही. अब हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को टीका लगाया जाए और सुरक्षा उपायों का अभ्यास किया जाए.
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी
भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला ने कोवैक्सीन को बनाने में पीपीपी मॉडल के महत्व पर बात की. उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन का विकास भारत में सार्वजनिक निजी भागीदारी के लिए बेहतर सफलता की कहानी है, जो आपसी सम्मान, विश्वास और पारदर्शिता पर आधारित है.