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कुछ साल पहले सरकार ने किसानों को दिए जाने वाले यूरिया के उद्योगों में होने वाले दुरुपयोग को रोकने के लिए उसे नीम कोटेड करना शुरू किया था। इसके बावजूद यूरिया का उद्योगों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, नीम कोटेड यूरिया भी अवैध तरीके से उद्योगों में जा रहा है। नीम कोटेड यूरिया को रसायनों से साफ कर इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे कई मामले पकड़े गए हैं। जांच के दौरान यह पता लगाया जाता है कि जो यूरिया इस्तेमाल हो रहा है, वह पहले नीम कोटेड था। इस प्रकार ऐसे उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
उद्योगों में खपत
सरकारी सूत्रों ने बताया कि उद्योगों में यूरिया की सालाना खपत 10-12 लाख टन के बीच है। देश में औद्यौगिक इस्तेमाल वाला यूरिया 1.5 लाख टन पैदा होता है तथा करीब दो लाख टन विदेशों से आयात किया जाता है। कुल 3.5 लाख टन यूरिया ही आधिकारिक रूप से उद्योगों को उपलब्ध है। जाहिर है कि किसानों के हिस्से का यूरिया उद्योगों में इस्तेमाल हो रहा है।
छह हजार करोड़ की चपत
सूत्रों ने बताया कि किसानों के यूरिया के दुरुपयोग से सरकार को हर साल करीब छह हजार करोड़ रुपये की चपत लग रही है। क्योंकि प्रत्येक बैग पर 2700 रुपये सरकार सब्सिडी के रूप में देती है।
पड़ोसी देशों को तस्करी
कई पड़ोसी देश भारत से तस्करी होकर जाने वाले यूरिया से ही काम चला रहे थे। इनमें म्यांमार, नेपाल तथा बांग्लादेश प्रमुख हैं। इन देशों के निकटवर्ती जिलों में अभियान चलाया गया है तथा कई वितरकों का पंजीकरण निरस्त किए गए हैं। वे किसानों के नाम पर यूरिया इन देशों में बेच रहे थे। नेपाल में भारत का यूरिया जाना अब बंद हो चुका है, जिसके चलते नेपाल को अब यूरिया का आयात करना पड़ रहा है।
छापामार दस्ता
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए छापेमार दस्ते तैयार किए हैं। तथा पिछले दो महीनो में ही करीब 100 करोड़ रुपये की चोरी पकड़ी है। इसमें यूरिया का डायवर्जन, दूसरे देशों को बेचना, मिलाकर घटिया गुणवत्ता का यूरिया तैयार करना शामिल है। इसमें करोड़ों रुपये की जीएसटी टैक्स चोरी भी शामिल है। बड़े पैमाने पर यूरिया जब्त किया गया है तथा कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।