'भगवान जगन्नाथ का है कोहिनूर हीरा' ओडिशा के संगठन ने की वापस लाने की मांग - Samacharline.com

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‘भगवान जगन्नाथ का है कोहिनूर हीरा’ ओडिशा के संगठन ने की वापस लाने की मांग

कोहिनूर को दुनिया के सबसे कीमती रत्नों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि साल 1310 में कोहिनूर आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में खातिया वंश के राज के दौरान खुदाई में मिला था।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मौत हो चुकी है। उनकी मौत के बाद से ही सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और भारत के यूजर्स ने कोहिनूर हीरे की मांग शुरू कर दी है। इसी बीच ओडिशा स्थित जगन्नाथ सेना ने दावा किया है कि कोहिनूर हीरा मूल रूप से भगवान जगन्नाथ का है और उन्होंने इसकी मांग की है।

कोहिनूर भगवान जगन्नाथ का?
दरअसल, जगन्नाथ सेना ने दावा किया है कि कोहिनूर भगवान जगन्नाथ का था। इतना ही नहीं जगन्नाथ सेना ने हीरा वापस लाने में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्तक्षेप की भी मांग की है। राष्ट्रपति को सौंपे गए एक ज्ञापन में जगन्नाथ सेना ने 12वीं शताब्दी के प्रसिद्ध पुरी मंदिर में कोहिनूर हीरे को वापस लाने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की मांग की है।

रणजीत सिंह ने जगन्नाथ को दान किया था!
जगन्नाथ सेना संयोजक प्रिया दर्शन पटनायक ने एक ज्ञापन में कहा कि कोहिनूर हीरा जगन्नाथ भगवान का है लेकिन अब यह इंग्लैंड की महारानी के पास है। कृपया हमारे प्रधानमंत्री से भगवान जगन्नाथ के लिए इसे भारत लाने के लिए कदम उठाने का अनुरोध है। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी इच्छा से इसे भगवान जगन्नाथ को दान कर दिया था।

ब्रिटेन ने देने से हमेशा इनकार किया
फिलहाल अब ब्रिटेन की महारानी की मौत के बाद कोहिनूर एक बाद फिर चर्चा में है। भारत में कोहिनूर को वापस लाने की कई बार मांग उठ चुकी है। लेकिन ब्रिटेन ने यह हीरा देने से हमेशा इनकार किया है। एक अनुमान के मुताबिक कोहिनूर की कीमत करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये है।

दुनिया के सबसे कीमती रत्नों में से एक
कोहिनूर को दुनिया के सबसे कीमती रत्नों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि साल 1310 में कोहिनूर आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में खातिया वंश के राज के दौरान खुदाई में मिला था।

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