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प्रेसीडेंट मुर्मू पर टीएमसी नेता की टिप्पणी पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने आज माफी मांग ली। हालांकि, दीदी की यह माफी मजबूरी ज्यादा नजर आ रही है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है पश्चिम बंगाल में आदिवासी वोट बैंक। आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान हैं। ऐसे में उनके ऊपर की गई नकारात्मक टिप्पणी आदिवासी समुदाय को किस कदर नागवार गुजर सकती है, इसका अंदाजा ममता बनर्जी को बखूबी है। यही वजह है कि उन्होंने अपने मंत्री अखिल गिरी की टिप्पणी पर माफी मांग मामले को रफा-दफा करना ही उचित समझा।
ऐसा है पश्चिम बंगाल में आदिवासी वोटों का गणित
पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय 7 से 8 फीसदी होने का अनुमान है। जंगलमहल क्षेत्र के चार विधानसभा क्षेत्रों, जिसमें बांकुरा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिमी मिदनापुर शामिल हैं। इसके अलावा उत्तरी बंगाल के दार्जिलिंग, कलिमपोंग, अलीपुर्दुआर, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, उत्तरी व दक्षिणी दिनाजपीर और मालदह में आदिवासियों की संख्या 25 फीसदी तक है। 2019 के लोकसभा चुनाव में, भाजपा ने यहां की 22 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी। तब उसे आदिवासी क्षेत्रों से बड़ा समर्थन मिला था। तब उसने जंगलमहल की सभी और उत्तरी बंगाल की 6 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि 2021 के विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी वापसी करने में सफल रही। तब उसने जंगलमहल जिले में जीत दर्ज की थी।