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‘आजमगढ़’ में पंकज त्रिपाठी ने एक ऐसी मौलवी की भूमिका निभाई है, जो नवयुवकों को आतंकवादी बनने के लिए प्रेरित करता है। इस फिल्म के बारे संपर्क किए जाने पर अभिनेता पंकज त्रिपाठी के करीबी बताते हैं कि पंकज की जानकारी में ये एक शॉर्ट फिल्म है और इसके लिए उन्होंने सिर्फ तीन दिन ही शूटिंग की। लेकिन फिल्म के निर्माता उनके नाम का इस्तेमाल करके फिल्म को ऐसे प्रचारित कर रहे हैं, जैसे फिल्म में पंकज त्रिपाठी की लीड भूमिका हो। सूत्रों के मुताबिक पंकज त्रिपाठी नहीं चाहते कि फिल्म में उनके नाम को जोड़कर सस्ती लोकप्रियता बटोरी जाए। बातचीत के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ कि पंकज त्रिपाठी ने बिना पारिश्रमिक लिए इस फिल्म में काम किया है।

फिल्म ‘आजमगढ़’ के निर्माता- निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा इस फिल्म से पहले ‘मधुबनी- द स्टेशन ऑफ कलर्स’ जैसी कई डाक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं। ‘मधुबनी -द स्टेशन ऑफ कलर्स’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है। ‘आजमगढ़’ के बारे में उन्होंने बताया कि चूंकि फिल्म के निर्माता वह खुद ही हैं इसलिए पैसे के अभाव में फिल्म बनने में थोड़ा समय लग गया। हालांकि, होर्डिंग पर बतौर निर्माता दो अन्य लोगों के नाम लिखे हैं। कमलेश के मुताबिक ये फिल्म साल 2017 में शुरू हुई थी। लेकिन जब उनसे यह कहा गया कि पंकज के करीबी तो इसे 10 साल पुरानी फिल्म बता रहे हैं तो उन्होंने कहा कि हां, ऐसा मान सकते हैं।

