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पोखरण के वक्त साथ देने वाला इकलौता पश्चिमी देश फ्रांस:मोदी नेशनल डे पर वहां जाने वाले दूसरे PM…जानें दौरा कितना अहम?

PM नरेंद्र मोदी गुरुवार को 2 दिन के दौरे पर फ्रांस रवाना हो गए हैं। 14 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री फ्रांस के नेशनल डे परेड में शामिल होगा। इससे पहले 2009 में तत्कालीन भारतीय PM मनमोहन सिंह ने इस कार्यक्रम में शिरकत की थी। वो पहले ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री थे जिन्हें फ्रांस ने नेशनल डे परेड में बुलाया था।

1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया तो अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों ने भारत पर कई पाबंदियां लगा दी थीं। तब फ्रांस पश्चिम का इकलौता ऐसा देश था, जिसने भारत का समर्थन किया। यही वो वक्त था जब दोनों देशों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई।

अब दोस्ती के 25 साल पूरे होने पर फॉरेन एक्सपर्ट प्रोफेसर राजन कुमार से दोनों देशों की दोस्ती से जुड़े 6 सवालों के जवाब जानते हैं…

तस्वीर 2009 में फ्रांस की नेशनल डे परेड में शामिल होने गए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की है।
तस्वीर 2009 में फ्रांस की नेशनल डे परेड में शामिल होने गए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की है।

सवाल 1: फ्रांस ने नेशनल डे परेड में PM मोदी को क्यों बुलाया और इसके क्या मायने हैं?

जवाब: 1998 में भारत और फ्रांस एक-दूसरे के स्ट्रैटेजिक पार्टनर बने थे। दोनों देशों ने स्ट्रैटेजिक पार्टनर बनने के लिए एक समझौता किया था। 2023 में इसके 25 साल पूरे हो रहे हैं। ऐसे में स्ट्रैटेजिक पार्टनर बनने की सिल्वर जुबली के मौके पर फ्रांस ने नेशनल डे परेड में भारत के प्रधानमंत्री को बुलाया है।

भारत दुनिया की सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत की इकोनॉमी 3.75 ट्रिलियन डॉलर की है। वहीं, फ्रांस एक विकसित अर्थव्यवस्था है। ऐसे में दोनों देशों को एक दूसरे के साथ की जरूरत है।

इस कार्यक्रम में PM मोदी को आमंत्रित करना ये दिखाता है कि फ्रांस किस तरह से भारत को अहमियत देता है। फ्रांस इकोनॉमी, डिफेंस, क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। इसी वजह से इस ऐतिहासिक मौके पर फ्रांस ने भारत के प्रधानमंत्री को बुलाया है।

सवाल 2: क्या फ्रांस ने अपने फायदे के लिए नेशनल डे पर प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया है?

जवाब: निश्चित रूप से बाकी पश्चिमी देशों की तरह फ्रांस ने भी अपने फायदे के लिए भारतीय प्रधानमंत्री को नेशनल डे पर आमंत्रित किया है। SIPRI के मुताबिक भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार है। वहीं, फ्रांस दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा हथियार बेचने वाला देश है।

2018 से 2022 के बीच भारत ने 30% हथियार फ्रांस से ही खरीदे हैं। सालाना भारत और फ्रांस के बीच लगभग 97 हजार करोड़ रुपए का ट्रेड है। साफ है कि फ्रांस के लिए भारत एक बड़ा मार्केट है। यही वजह है कि भारत के साथ बेहतर संबंध बनाना उसकी अपनी मजबूरी भी है।

PM मोदी इससे पहले चार बार फ्रांस जा चुके हैं। तस्वीर में उन्हें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ देखा जा सकता है।
PM मोदी इससे पहले चार बार फ्रांस जा चुके हैं। तस्वीर में उन्हें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ देखा जा सकता है।

सवाल 3: भारत और फ्रांस किन मुद्दों पर एक-दूसरे से सहयोग चाहते हैं?

जवाब: फ्रांस और भारत एक-दूसरे से किसी एक मुद्दे पर सहयोग नहीं चाहते हैं। दोनों के बीच सालों से दुनिया के अलग-अलग इश्यूज को लेकर अच्छी साझेदारी रही है। इनमें से कुछ ये मुद्दे हैं…

पहला मुद्दा- UNSC में बदलाव
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में फ्रांस स्थाई सदस्य है। भारत लंबे समय से UNSC में बदलाव की मांग करता रहा है। भारत का मानना है कि UN के बनने के बाद से दुनिया काफी बदल चुकी है। ऐसे में दुनिया को चलाने वाली संस्था में भी बदलाव जरूरी है।

UN को चंद देशों के इशारे पर चलना बंद करना चाहिए। फ्रांस भी भारत की इन मांगों का समर्थन करता है। वहीं, दूसरी ओर UNSC में भारत स्थाई सदस्यता की मांग करता है। इसे लेकर फ्रांस ने भारत का ही पक्ष लिया है।

दूसरा मुद्दा- मल्टी पोलर दुनिया की चाहत
भारत की तरह ही फ्रांस भी मल्टी पोलर वर्ल्ड का समर्थक है। इसका मतलब ये हुआ कि दोनों देश दुनिया में किसी एक देश का दबदबा कायम होने देना नहीं चाहते हैं। इसका ताजा उदाहरण चीन पर अमेरिका के खिलाफ फ्रांस का स्टैंड है। नाटो का मेंबर होने के बावजूद फ्रांस ने साफ कह दिया था कि वो चीन पर अमेरिका के इशारों पर नहीं चलेगा। फ्रांस ताइवान के मामले में भी अमेरिका की नीतियों का समर्थन नहीं करता है।

वहीं, अगर भारत की बात करें, तो भारत शीत युद्ध के दौर से ही किसी एक खेमे का समर्थक होने की खिलाफत करता रहा है। इसके अलावा इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी दोनों देश साथ खड़े हैं।

तीसरा मुद्दा- डिफेंस में साझेदारी
यूक्रेन जंग के बाद से भारत हथियारों को लेकर रूस पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है। इसके लिए वो रास्ते तलाश रहा है। किसी एक देश पर निर्भर रहने की बजाय भारत अलग-अलग देशों के बेहतर हथियारों को सेना के लिए खरीद रहा है।

PM मोदी के अमेरिका दौरे पर भारत ने MQ-9 ड्रोन की डील की है। वहीं, जर्मनी के साथ 6 पनडुब्बियां बनाने का समझौता होना तय माना जा रहा है। फ्रांस से भारत ने 36 राफेल फाइटर जेट्स लिए हैं।

PM मोदी की फ्रांस विजिट के दौरान भी 26 और राफेल की घोषणा हो सकती है। इन्हें भारतीय नौसेना के लिए खरीदा जा रहा है। साथ ही भारत की मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड यानी MDL को फ्रांस के सहयोग से तीन और स्कॉर्पीन-क्लास अटैक सबमरीन बनाने का मौका मिल सकता है।

सवाल 4: क्या भारत के जरिए इंडो-पैसिफिक में मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है फ्रांस?

जवाब: हां, गौर करें कि फ्रांस इस बार भारत को जो 26 रफाल जेट दे रहा है, वो नौसेना इस्तेमाल करेगी। समुद्र की बात करें तो फिलहाल भारत को जो खतरा है वो चीन की ओर से है। भारत इन राफेल जेट्स का इस्तेमाल इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ अपनी पोजिशन को मजबूत करने में करेगा। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन फ्रांस, भारत के जरिए इंडो-पैसिफिक में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है।

दरअसल, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने साल 2021 में मिलकर इंडो-पैसिफिक को लेकर एक संगठन बनाया था। शुरुआत में फ्रांस को भी इसका सदस्य बनाने की बात चली थी। हालांकि, लास्ट मोमेंट पर उसे छोड़ दिया गया। फ्रांस ने इस पर काफी नाराजगी जाहिर की थी। यहां तक कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के इस कदम को उसने धोखा देने और पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया था।

सवाल 5: भारत को लेकर फ्रांस का स्टैंड दूसरे पश्चिमी देशों से अलग कैसे है?

जवाब: आपने कई बार अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी को भारत में मानवाधिकार और लोकतंत्र को लेकर सवाल खड़े करते हुए सुना होगा। फ्रांस इनकी तुलना में भारत के आंतरिक मामलों में काफी कम दखलंदाजी करता है। ये एक मुख्य वजह है कि भारत का फ्रांस के साथ कभी कोई बड़ा मनमुटाव नहीं रहा है।

इसके अलावा जुलाई 1998 में भारत ने परमाणु ताकत बनने की ठानी और न्यूक्लियर टेस्ट किए तो सभी पश्चिमी देशों ने इस पर आपत्ति जताई। अमेरिका ने भारत पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। तब फ्रांस के राष्ट्रपति जैक शिराक ने भारत का समर्थन किया था।

पश्चिमी देशों के उलट जाकर फ्रांस ने भारत को न्यूक्लियर प्लांट सेटअप करने में मदद की। आपको ये जानकारी हैरानी होगी कि रूस के बाद फ्रांस इकलौता ऐसा देश है जिसने भारत की न्यूक्लियर कैपेबिलिटी को बढ़ाने में मदद की। इस प्लांट को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी हैं। महाराष्ट्र के जैतपुर में लगा परमाणु प्लांट फ्रांस की मदद से ही मुमकिन हो पाया।

सवाल 6: भारत और फ्रांस किन मुद्दों पर एक साथ नहीं…

जवाब: भारत और फ्रांस के बीच जिन मुद्दों को लेकर मतभेद हैं वो ज्यादातर टैरिफ से जुड़े हैं। फ्रांस यूरोपियन यूनियन का सदस्य है। ऐसे में दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर होने वाली डील EU की निगरानी से होकर गुजरती हैं।

EU भारत से कार, वाइन, स्कॉच, शैंपेन और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स पर इम्पोर्ट टैरिफ को कम करने की मांग कर चुका है। इसके अलावा वीजा, पेटेंट को लेकर भी दोनों के बीच मतभेद हैं। जिसके चलते EU के साथ भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन नहीं कर पाया है।