Madhya Pradesh : भगवान चित्रगुप्त का प्रकटोत्सव भोपाल में बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाएगा
भोपाल। भगवान चित्रगुप्त प्रकटोत्सव के अवसर पर 23 अप्रैल 2026 को राजधानी...
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उज्जैन। स्पेशल डीजी जैन ने सिंहस्थ 2028 के दौरान बाहर से आने...
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अद्वैत ज्ञान के सूर्योदय...
Prime Minister Narendra Modi has praised this initiative. Dr. Yadav repeatedly emphasizes...

उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा आगामी 15 एवं 16 जून को उज्जैन में माँ शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं गंगा दशहरा के कार्यक्रमों की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दत्त अखाड़ा एवं रामघाट पर होने वाले कार्यक्रमों में आमजन की भागीदारी के दृष्टिगत सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। शिप्रा घाट पर पूजन और चुनरी अर्पण, सुविधायुक्त मंच के निर्माण, श्रद्धालुओं के लिए आने-जाने से संबंधित सुविधाओं और विभिन्न पड़ाव स्थलों पर जरूरी प्रबंध के निर्देश भी दिए गए। माँ शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के पूर्व यात्रा मार्ग में विभिन्न घाटों की सफाई एवं आवश्यक सुरक्षा के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।
उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बुधवार सुबह मां शिप्रा तीर्थ यात्रा समिति के सदस्यों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ शिप्रा तीर्थ परिक्रमा मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर एसपी ने 16 जून को प्रस्तावित शिप्रा तीर्थ मार्ग के रूट का भ्रमण किया।

कलेक्टर एसपी ने अधिकारियों के साथ दत्तअखाडा से रणजीत हनुमान, कालभैरव, भैरवगढ़ सिद्धनाथ,अंगारेश्वर, कमेड, मंगलनाथ, सान्दीपनी आश्रम, राम मंदिर, गढ़कालिका, भृतहरीगुफा, ऋणमुक्तेश्वर, वाल्मीकी धाम (भोजन विश्राम कार्यक्रम) का भ्रमण किया। उन्होंने उक्त धार्मिक स्थलों पर जाकर मां शिप्रा परिक्रमा समिति के सदस्यों से व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि गंगा दशमी पर नमामि गंगे सदानीरा अभियान से जुड़ी गतिविधियां हो रही हैं। पारम्परिक शिप्रा परिक्रमा को अभिनव स्वरूप दिया गया है। शिप्रा तट पर सांगीतिक प्रस्तुति, पारम्परिक कथा गायन परम्परा का निर्वहन भी होगा। नदियों के सांस्कृतिक एवं पारम्परिक तथा लोक साहित्य के अध्ययन, ऐतिहासिक पारम्परिक जल संरचनाओं को सतत् प्रवाहमान बनाए रखने के लिए सुझावों का संकलन किया गया है। इंजीनियरिंग पक्ष का अध्ययन भी किया गया है। अभियान का दस्तावेजीकरण और प्रकाशन किया गया है। मैपकास्ट के सहयोग से सेटेलाइट मैपिंग भी की गई है। विशेष फोल्डर एवं पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं। प्रदेश की 212 महत्वपूर्ण नदियों के संबंध में विस्तृत जानकारियों का समावेश इन प्रकाशनों में किया गया है।