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व्यक्ति, परिवार और समाज में बदलाव से ही राष्ट्र प्रगति करेगा, संगठन के रूप में संघ आंदोलन नहीं करता, लेकिन स्वयंसेवक समाज में चल रहे अभियानों का समर्थन करते हैं -नरेंद्र कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘प्रमुख जन संवाद’ कार्यक्रम संपन्न

उज्जैन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा रविवार को श्री धन्वंतरि आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय में ‘प्रमुख जन संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें संभाग भर से सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, समाचार पत्रों के संपादक, ब्लॉगर और स्तंभकार शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में विचार निर्माण और सकारात्मक विमर्श को दिशा देना रहा। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार ने संघ के उद्देश्य, राष्ट्र निर्माण की अवधारणा और ‘पंच परिवर्तन’ जैसे विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।मंच पर विभाग संघ चालक श्री बलराज भट्ट उपस्थित रहे।

नरेंद्र कुमार ने कहा कि आज के दौर में समाज केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि उनके विश्लेषण और प्रस्तुतिकरण से अधिक प्रभावित होता है, जिसमें लेखकों और विचारकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई और मंच पर उपस्थित पदाधिकारियों का परिचय कराया गया। कार्यक्रम में संवाद, समन्वय और समाज को जागृत करने पर विशेष जोर दिया गया।

परम वैभव की परिकल्पना: शक्तिशाली और शांतिपूर्ण भारत

मुख्य वक्ता नरेंद्र कुमार ने कहा कि संघ का उद्देश्य भारत को ‘परम वैभव’ की स्थिति तक पहुंचाना है। इसका अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनाना है जो हर क्षेत्र में अग्रणी हो और विश्व में शांति का संदेश दे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की शक्ति कभी आक्रामक नहीं रही, बल्कि उसने सदैव विश्व को सांस्कृतिक मूल्य और सहअस्तित्व का संदेश दिया है। भारत के मजबूत बनने से विश्व में स्थिरता और शांति सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक प्रतिदिन इसी संकल्प के साथ कार्य करते हैं कि भारत माता की जय विश्वभर में गूंजे, लेकिन बिना किसी पर अपनी विचारधारा थोपे।

स्वाधीनता से आत्मनिर्भरता तक: ‘स्व’ का बोध आवश्यक

उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति का आधार ‘स्व’ की भावना है—स्वदेशी, स्वभाषा और स्वावलंबन। यदि देश को आत्मनिर्भर बनाना है तो हमें अपने मूल्यों, परंपराओं और भाषा पर गर्व करना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करना भी आत्मसम्मान का प्रतीक है। वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता ही देश को सुरक्षित रख सकती है। स्वदेशी उत्पादों को अपनाने से न केवल आर्थिक मजबूती आएगी, बल्कि राष्ट्र की स्वतंत्र पहचान भी सुदृढ़ होगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे ‘स्व’ की भावना को अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाएं।

परिवार और संस्कार: समाज की असली ताकत

नरेंद्र कुमार ने भारतीय परिवार व्यवस्था को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसके संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से है, जिसे दुनिया भी स्वीकार करती है। हालांकि आधुनिकता के दौर में इन मूल्यों में कुछ कमी आई है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है। नई तकनीकों का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसका विवेकपूर्ण उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि परिवार सशक्त रहेगा तो समाज और राष्ट्र भी मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि संस्कारों से ही आने वाली पीढ़ी सही दिशा में आगे बढ़ेगी।

पंच परिवर्तन: समाज परिवर्तन के पांच सूत्र

संघ ने समाज में परिवर्तन के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान किया है। इसमें सामाजिक समरसता, स्व का बोध, सशक्त परिवार, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा या अन्य आधारों पर भेदभाव समाप्त करना जरूरी है। पर्यावरण के संदर्भ में पेड़, पानी और प्लास्टिक पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही, नागरिकों को नियमों का पालन करना और अनुशासन में रहना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ये पांच सूत्र व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं, लेकिन इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।

प्रश्नोत्तर सत्र

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख जनों ने संघ और उसके कार्य को लेकर अपनी जिज्ञासा भी जाहिर की जिसका उत्तर मुख्य वक्ता ने दिया।

प्रश्न 1: संघ कार्यक्रमों में फोटो/वीडियो लेने को लेकर संकोच क्यों रहता है?

उत्तर: नरेंद्र कुमार ने कहा कि यह पुरानी धारणा है जब संघ प्रचार से दूरी रखता था। अब सार्वजनिक कार्यक्रमों में सोशल मीडिया का उपयोग किया जाता है। कुछ आंतरिक बैठकों में ही सीमितता रहती है ताकि खुला संवाद हो सके। सामान्य कार्यक्रमों में अनुशासन रखते हुए फोटो-वीडियो लेना स्वीकार्य है, इसलिए इसे लेकर किसी प्रकार का भय या भ्रम रखने की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न 2 : भ्रष्टाचार के खिलाफ संघ क्या करता है?

उत्तर: उन्होंने कहा कि संघ मूल रूप से व्यक्ति निर्माण पर काम करता है। शाखा में ऐसे संस्कार दिए जाते हैं जिससे स्वयंसेवक अपने जीवन में ईमानदारी अपनाए और भ्रष्टाचार से दूर रहे। संगठन के रूप में संघ आंदोलन नहीं करता, लेकिन स्वयंसेवक समाज में चल रहे अभियानों का समर्थन करते हैं। दीर्घकालीन समाधान के लिए चरित्र निर्माण को सबसे प्रभावी उपाय माना गया है।

प्रश्न 3: युवाओं को स्वरोजगार के लिए संघ की क्या भूमिका है?

उत्तर: उन्होंने कहा कि संघ प्रत्यक्ष रूप से रोजगार योजनाएं नहीं चलाता, लेकिन स्वावलंबन और स्वदेशी के विचार के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करता है। विभिन्न संगठनों और मंचों के जरिए युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित होती है। उद्देश्य यह है कि युवा आत्मनिर्भर बनें और समाज की आर्थिक मजबूती में योगदान दें।

प्रश्न 4: विद्यार्थी परिषद और संघ के कार्य में अंतर क्या है?

उत्तर: उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थी परिषद छात्रों की समस्याओं और नेतृत्व विकास पर काम करती है, जबकि संघ का कार्य व्यापक व्यक्ति निर्माण है। परिषद कॉलेज तक सीमित रहती है, जबकि संघ जीवनभर का संस्कार देता है। दोनों के कार्यक्षेत्र अलग हैं, लेकिन उद्देश्य समान है—राष्ट्र निर्माण के लिए जागरूक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना।

प्रश्न 5: हिंदू एकता के लक्ष्य की प्रगति कैसे मापी जाए?

उत्तर: नरेंद्र कुमार ने कहा कि इसे प्रतिशत में मापना संभव नहीं है। पिछले 100 वर्षों में समाज में बड़ा बदलाव आया है और आज लोग अपनी पहचान पर गर्व करते हैं। राम मंदिर जैसे उदाहरण इस जागृति के प्रतीक हैं। लक्ष्य सामूहिक प्रयास से ही पूरा होगा और जितनी भागीदारी बढ़ेगी, उतनी जल्दी यह संकल्प साकार होगा।

प्रश्न 6: सोशल मीडिया पर नकारात्मक कंटेंट को कैसे रोका जाए?
उत्तर: उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें स्वयं सकारात्मक और संस्कारित कंटेंट बनाना चाहिए। नकारात्मक सामग्री को बढ़ावा न दें और ऐसे हैंडल्स को रिपोर्ट करें। सरकार को भी सख्त नियम बनाने चाहिए, लेकिन समाज की जिम्मेदारी अधिक महत्वपूर्ण है। जितना अच्छा कंटेंट बढ़ेगा, उतना ही खराब कंटेंट स्वतः कम होता जाएगा।