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विश्व साइकिल दिवस पर हुआ साइकलोदय(विचार–विमर्श)- 2026 कार्यक्रम, वैश्विक संकट के दौर में साइकिल की उपयोगिता पर हुआ मंथन

साइकिल ही ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन का सबसे सुलभ समाधान : कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज

पर्यावरण, स्वास्थ्य और समय की बचत का माध्यम है साइकिल : पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा

साइकिल जीवन, अनुशासन और दर्शन का प्रतीक है : उप संचालक जनसंपर्क अरुण कुमार राठौर

उज्जैन, 3 जून 2026 । विश्व साइकिल दिवस (3 जून) के अवसर पर सोसायटी ऑफ ग्लोबल साइकिल द्वारा साइकलोदय(विचार–विमर्श) 2026 कार्यक्रम का आयोजन ‘वैश्विक संकट में साइकिल की उपयोगिता और उसके महत्व’ विषय पर पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में किया गया। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय एवं मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, जिला उज्जैन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने वैश्विक संकट में साइकिल की उपयोगिता और उसके महत्व पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर साइकिल मित्र सम्मान समारोह और चित्रकला प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण कार्यक्रम एवं सोसायटी ऑफ ग्लोबल साइकिल की वेबसाइट का अनावरण, भी हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. अपर्ण भारद्वाज, कुलगुरु, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज का वैश्विक ऊर्जा संकट हमें स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पेट्रोल पंपों के सामने लगी कतारें, ईंधन की अनिश्चित उपलब्धता और युद्ध, प्रतिबंध तथा परिवहन बाधाएं इस संकट की झलक मात्र हैं। वक्ता ने चेताया कि आने वाले लगभग 200–250 वर्षों में यह संकट और भी गंभीर हो सकता है, जब जीवाश्म ईंधन लगभग समाप्ति की ओर होगा और पूरा विश्व ऊर्जा के वैकल्पिक समाधानों पर निर्भर होगा। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और कारें भविष्य का संकेत हैं, लेकिन अभी उनकी लागत और पहुंच आम नागरिक तक नहीं है। ऐसे में सबसे सस्ता, सुलभ और प्रभावी उपाय साइकिल है, विशेषकर भारत जैसे विकासशील देश के लिए।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की संकल्पना तभी साकार हो सकती है जब धरती सुरक्षित और स्वस्थ रहेगी। युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हमें स्वस्थ प्रकृति चाहिए, तो हमें अपनी जीवनशैली और सोच में बदलाव लाना होगा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि आमतौर पर लोग साइकिल को केवल स्वास्थ्य और फिटनेस से जोड़कर देखते हैं। लेकिन वास्तव में यह न केवल स्वास्थ्यवर्धक बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभकारी है और अनेक उद्देश्यों की पूर्ति करती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम विकसित समाज की ओर बढ़ते हैं, वैसे-वैसे कार जैसी सुविधाओं की ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन शहरी भीड़, संकरी गलियां, पार्किंग, रिवर्स और टर्न जैसी समस्याएं हमें कार की सीमाओं का एहसास कराती हैं।

उन्होंने कहा कि विकास के साथ समय और परिश्रम की कीमत भी समझ में आने लगती है, और तभी हम ‘बैक टू बेसिक्स’ की ओर लौटने का प्रयास करते हैं। साइकिल इसका सबसे सशक्त उदाहरण है।

उन्होंने उज्जैन को ‘साइकिल सिटी’ बनाने की परिकल्पना की सराहना करते हुए कामना की कि भविष्य में ऐसा समय आए जब लोग सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अरुण कुमार राठौर, उप संचालक जनसंपर्क ने अपने वक्तव्य में कहा कि साइकिल केवल एक साधन नहीं, बल्कि वह चक्का है जो जीवन को आगे बढ़ाता है। पेट्रोल-डीजल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में साइकिल बच्चों, युवाओं और समाज सभी के लिए अनिवार्य हो गई है। यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कार तीनों का संरक्षण करती है। उन्होंने कहा कि यदि हम साइकिल को जीवन का हिस्सा बनाते हैं, तो न केवल स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और शहर का भविष्य भी उज्ज्वल बनेगा।

इस अवसर पर सतत् शिक्षा अध्ययनशाला के निदेशक डॉ सुशील कुमार शर्मा, वरिष्ठ आर्किटेक्ट श्रीकांत वैशमपायन विशेष रूप से मंचासीन रहे।
सायं 4 बजे सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय की पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला परिसर में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके उपरांत यूथ हॉस्टल एसोसिएशन के गोपाल महाकाल, खेल शिक्षक अनिल निकम, साइकिल व्यवसायी रोहित येवले ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। अतिथि परिचय सोसायटी ऑफ ग्लोबल साइकिल के सचिव विवेक मेश्राम ने और कार्यक्रम की रूपरेखा सोसायटी ऑफ ग्लोबल साइकिल के अध्यक्ष उत्कर्ष सिंह सेंगर द्वारा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का संचालन गोपाल गर्वित ने किया और आभार कार्यक्रम संयोजक अमित परमार ने ज्ञापित किया।

साइकिल मित्र सम्मान से किया सम्मानित

विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर कार्यक्रम के दौरान

साइकिल मित्र सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया। इस वर्ष MPEB से सेवानिवृत श्री शशिकांत वीरकर, श्री भरत कुमार तिवारी एवं शा . उ. मा. विद्यालय माधवगंज उज्जैन में व्यायाम शिक्षक (PTI) के रूप में पद कार्यरत श्री प्रवीण सिंह गौतम को दैनिक कार्यों में साइकिल के उपयोग और साइकिल के प्रति जागरूकता फैलाने और उसके प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘साइकिल मित्र सम्मान-2026’ प्रदान किया गया ।

चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को मिला पुरस्कार

प्रतियोगिता के समन्वयक तुषार पिल्लैवार ने बताया विश्व साइकिल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘साइकलोदय’ विचार-विमर्श कार्यक्रम के अंतर्गत संस्था द्वारा ‘ईंधन बचाओ, साइकिल अपनाओ’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था। यह प्रतियोगिता दो आयु वर्गों पहली 8 से 15 वर्ष तथा दूसरी 15 से 25 वर्ष के प्रतिभागियों के लिए आयोजित की गई थी। दोनों श्रेणियों में कुल 70 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया, जिनमें से 32 प्रतिभागियों ने अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियाँ प्रस्तुत कीं। प्रतियोगिता की कलाकृतियों का मूल्यांकन निर्णायक मंडल के संयोजक श्री अमूल पिलेवार द्वारा किया गया तथा उनके मार्गदर्शन में विजेताओं का चयन किया गया। पहली श्रेणी में प्रथम पुरस्कार नंदनी पाटीदार, द्वितीय इशिका निषाद, तृतीय युक्ता पाटीदार और प्रोत्साहन पुरस्कार जानवी शर्मा को प्रदान किया गया तथा दूसरी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार अंशिता द्विवेदी, द्वितीय प्रचेता द्विवेदी, तृतीय निशा पाटीदार और प्रोत्साहन पुरस्कार आशुतोष तिवारी को दिया गया। इसके अलावा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।