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उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के दावों के बीच श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे हरसिद्धि से चारधाम मंदिर जाने वाला मार्ग पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया। हल्की बारिश के बाद सड़क पर इतना पानी भर गया कि राहगीरों को सड़क कम और तालाब ज्यादा नजर आने लगा। विडंबना यह है कि यह कोई निर्माणाधीन या खुदी हुई सड़क नहीं है, बल्कि यहां पक्का मार्ग है। इसके बावजूद जल निकासी की व्यवस्था कहीं दिखाई नहीं दी। नतीजा यह रहा कि वाहन चालक पानी के बीच से रास्ता तलाशते नजर आए और पैदल चलने वालों को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी।
हालात ऐसे बने कि कुछ लोगों ने भरे पानी को पार करने के लिए ई-रिक्शा का सहारा लिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कुछ समय की सामान्य बारिश में यह स्थिति बन रही है, तो मानसून के चरम पर पहुंचने पर क्या हाल होगा? यदि सड़कों पर पानी का ठहरना ही विकास की नई पहचान है, तो संबंधित विभागों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि बारिश के पानी की निकासी उनकी योजना का हिस्सा थी या नहीं। प्रशासन और निर्माण एजेंसियां अक्सर विश्वस्तरीय सुविधाओं और बेहतर अधोसंरचना के दावे करती हैं, लेकिन पहली बारिश ने यह याद दिला दिया कि विकास केवल चमचमाती सड़कों से नहीं, बल्कि उन सड़कों पर पानी न ठहरने से भी मापा जाता है। सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन की तैयारियों के बीच यह जलभराव एक छोटा दृश्य जरूर है, लेकिन यह बड़ा सवाल छोड़ जाता है—क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच केवल फाइलों में हुई है, या बारिश को भी कभी परीक्षक माना जाएगा?