पिता के साथ जेल में रहा चार वर्षीय मासूम, जमानत पर रिहाई के दौरान भावुक दृश्य
मई माह में एक ऐसा मामला...
मई माह में एक ऐसा मामला...
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार...

मई माह में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने कानून के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर दिया। पत्नी की आत्महत्या के मामले में गिरफ्तार एक व्यक्ति को न्यायालय द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। उस दौरान उसका लगभग चार वर्षीय पुत्र अपने पिता से अलग होने को तैयार नहीं हुआ। बच्चे की भावनात्मक स्थिति को देखते हुए उसे भी पिता के साथ जेल में रहने की अनुमति प्रदान की गई।
शुक्रवार को आरोपी की जमानत मंजूर होने के बाद उसकी रिहाई हुई। रिहाई के समय जेल परिसर के बाहर एक भावुक दृश्य देखने को मिला। आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विकास दुबे, प्रवीण सिंह चौहान, विकास गोमे, अजय राज सिंह राठौर एवं भूपेंद्र सिंह चौहान अपने मुवक्किल की रिहाई के लिए जेल के बाहर उपस्थित थे।
जैसे ही जेल का मुख्य द्वार खुला, सबसे पहले वह मासूम बच्चा उछलता-कूदता हुआ बाहर निकला। उसके चेहरे पर घर लौटने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। जेल से रिहा हो रहे अन्य बंदी भी बच्चे को देखकर मुस्कुरा उठे और स्नेहपूर्वक उससे मिले। कुछ ही क्षण बाद उसके पिता भी जेल से बाहर आए।
मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने बच्चे से सहज बातचीत की। जब उससे पूछा गया कि क्या वह वापस जेल जाना चाहेगा, तो उसने तुरंत मासूमियत से जवाब दिया, “नहीं, अब घर जाऊँगा।” उसके इस उत्तर ने वहां उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया।
बातचीत के दौरान बच्चे ने यह भी बताया कि जेल में उसके लिए अलग से भोजन की व्यवस्था होती थी और उसे पराठे सहित अन्य खाने की चीजें मिलती थीं। उसकी सहज और निश्छल बातें सुनकर उपस्थित लोगों को यह एहसास हुआ कि वह जेल की दीवारों के भीतर भी अपने पिता के सान्निध्य में स्वयं को सुरक्षित महसूस करता था।
हालांकि कानून की प्रक्रिया अपने निर्धारित मार्ग पर चलती है, लेकिन इस मासूम बच्चे की मुस्कान और अपने पिता के प्रति उसका लगाव यह याद दिलाता है कि हर मुकदमे के पीछे मानवीय भावनाएं भी होती हैं। रिहाई के दौरान का यह दृश्य वहां उपस्थित अधिवक्ताओं के लिए एक ऐसा अनुभव बन गया, जिसकी कीमत किसी भी फीस से कहीं अधिक थी।