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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता...
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वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन और विश्व हिन्दी मंच द्वारा 20 से 26 अप्रैल 2025 तक 7 दिवसीय वियतनाम यात्रा का आयोजन किया गया था। इस यात्रा में करीब-करीब पूरे देश के 50 सहयात्री शामिल हुए। इनमें से 9 यात्री उज्जैन से गए थे। उसमें हम भी शामिल थे। सभी यात्री 20 अप्रैल तक अपनी-अपनी जगह से दिल्ली पहुंच गए थे। रात्रि में ही दिल्ली से हवाई जहाज से प्रस्थान कर 21 अप्रैल को प्रातः वियतनाम देश की राजधानी हनोई पहुंचे। जिस देश की जब हम यात्रा करते हैं, तो उस देश का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति पहले जान लें तो यात्रा का मजा दोगुना हो जाता है। इसलिए चलें, हम जानते हैं, यही बातें वियतनाम के बारे में।
वियतनाम का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति –
वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया का एक देश है। इसका इतिहास संघर्ष, कृषि प्रधान सभ्यता और अनूठी संस्कृति का एक अनूठा संगम है, जो चीनी, भारतीय और फ्रांसीसी प्रभावों से गढ़ा गया है। वियतनाम का इतिहास प्राचीन काल और कांस्य युग वियतनाम की सभ्यता की शुरुआत रेड रिवर डेल्टा से हुई। यहाँ की संस्कृति कांस्य युग में अपने अलंकृत कांस्य ढोलों के लिए प्रसिद्ध थी। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर 938 ईस्वी तक वियतनाम पर चीनी राजवंशों का शासन रहा। इस लंबे कालखंड ने यहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था और दर्शन को प्रभावित किया। 10वीं शताब्दी में चीन से स्वतंत्र होने के बाद ली, त्रान और ले राजवंशों के अधीन वियतनाम ने कला, साहित्य और बौद्ध धर्म का स्वर्ण युग देखा। मध्य वियतनाम में भारतीय संस्कृति से प्रेरित चंपा साम्राज्य का विकास हुआ, जहाँ भगवान शिव और विष्णु की पूजा होती थी। 19वीं सदी के अंत में फ्रांसीसी उपनिवेश और 20वीं सदी में वियतनाम युद्ध के बाद देश ने भारी संघर्ष झेला, अंततः 1976 में यह एक स्वतंत्र और एकीकृत समाजवादी गणराज्य बना।
वियतनाम ने 21 साल तक अमेरिका से युद्ध लड़ा और अंत तक पराजित नहीं हुआ। युद्ध में 30 हजार से अधिक जवान और नागरिक शहीद हुए। वियतनाम में अग्रेंजी का उपयोग नहीं होता है। इस देश पर वर्षों तक फ्रांसीसी कब्जा रहा तो यहां की लिपि फ्रेंच लिपि ही है। वियतनाम के लोग अपने क्रान्तिकारी नेता हो चि मिन्ह को देवता की तरह मानते है। जैसे हमारे देश के रूपये पर गांधी जी का चित्र है वैसे ही वियतनामी मुद्रा डोंग पर भी हो चि मिन्ह का ही चित्र रहता है। वियतनाम का समय हमारे देश भारत से डेढ़ घंटा आगे चलता है। जैसे भारत में शाम के 4 बजे हैं तो वियतनाम में समय 5.30 का होगा।

बौद्ध मंदिर पैगोड़ा –
हम सभी यात्रियों को दो बस से यात्रा कराई जा रही थी। सबसे पहले हमें हनोई के एक बौद्ध मंदिर पैगोड़ा ले जाया गया। वियतनाम में बौद्ध मंदिरों को पैगोड़ा कहा जाता है। यहाँ कई प्राचीन और भव्य पैगोड़ा स्थित हैं, जो अपनी अनूठी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। पैगोड़ा काफी भव्य और सुंदर है। सबने यहाँ खूब फोटो खींचे।
इसके बाद हम सबने वियतनाम की राजधानी हनोई की संसद भवन, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भवन, सचिवालय और पार्क आदि देखे। सब भवन अत्यन्त भव्य और सादगीपूर्ण थे। सबने इस परिसर में पैदल घूमकर बाहर से सभी भवन देखे।
हो चि मिन्ह स्मारक –
इसके बाद सभी यात्रियों ने हो चि मिन्ह स्मारक देखा। यहां उनके शव को सुरक्षित रखा गया है। इस स्मारक के सामने दो सैनिक 24 घंटे पहरा देते है। जब सैनिकों की अदला-बदली होती है तो वह दृश्य रोमांचित कर देता है। यह विशाल संरचना ग्रेनाइट और संगमरमर से बना है, जहाँ उनके नश्वर शरीर को कांच के ताबूत में सुरक्षित रखा गया है। इसका निर्माण वर्ष 1973 से 1975 के बीच किया गया। यह वियतनाम के राष्ट्रीय नायक अंकल हो की याद में बनाया गया सबसे पवित्र और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्मारक है। इस स्मारक के सामने हम सबने हो चि मिन्ह की देन को मन ही मन नमन करते हुए ग्रुप फोटो खींचा।
ट्रेन स्ट्रीट –

शाम को हम सबने हनोई की प्रसिद्ध ट्रेन स्ट्रीट देखी। यहां आश्चर्यजनक दृश्य देखा। यहां का बाजार रेल पटरी के बिल्कुल पास में बना है। यहां दुकान के बाहर बेंच पर बैठाकर और स्टुल पर नाश्ता और काफी आदि परोसा जाता है। और जब ट्रेन के आने का समय हुआ, ट्रेन सामने से आते दिखी, मन धक सा रह गया। हमारे बिल्कुल पास से ट्रेन धड़धड़ाती हुई निकल गई। उसका रोमांच अविस्मरणीय है। इसका सबने खूब मजा लिया।
यूनेस्को विश्व धरोहर हा लाॅन्ग बे –
हम सब यात्री हनोई से 22 अप्रैल की सुबह प्रसिद्ध यूनेस्को विश्व धरोहर हा लॉन्ग बे के लिए बस से निकले। वहाँ पहुंचकर हम सब एक शानदार क्रूज में बैठे। क्रूज का नाम था ओएसिस आफ द बे। क्रूज पर पहुंचते ही सबसे पहले हमारे हाथों में प्लास्टिक बैंड बांध दिया गया। यही हमारी पहचान और कमरे की चाबी थी। यहाँ से हमारा क्रूज निकला बीच समुद्र में, जहां चारों ओर अनेक आकर्षक और भव्य पहाड़ियां है। प्रकृति की यह अनुपम भेंट है। सबने मन भरके फोटो खींचे और सेल्फी ली।
वियतनाम का हा लॉन्ग बे उत्तरी वियतनाम के क्वांग निन्ह प्रांत में स्थित एक प्रसिद्ध यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। राजधानी हनोई से इसकी दूरी लगभग 170 किलोमीटर है। यहाँ हरे-भरे पानी के बीच चूना पत्थर के 1,600 से अधिक खूबसूरत द्वीप और टापू मौजूद हैं। हा लॉन्ग बे नाम का अर्थ वियतनामी भाषा में उतरता हुआ अजगर होता है। प्राकृतिक सुंदरता इसकी विशेषता है। यह शांत और पन्ना-हरे रंग के पानी के लिए जाना जाता है, जिसके बीच विशाल चट्टानें खड़ी हैं। पर्यटक यहाँ क्रूज की सवारी, कयाकिंग और प्राचीन गुफाओं की सैर का आनंद लेते हैं। हनोई से इसकी दूरी करीब 150-170 किमी है। सड़क मार्ग द्वारा लगभग 2 से 2.5 घंटे लगते हैं।
क्रुज की रोमांचक यात्रा और शाकाहारी भोजन –
हम सहयात्रियों में से अधिकतर ने अपने जीवन में पहली बार क्रुज से यात्रा की और उसमें करीब 24 घंटे बिताए। क्रुज की रोमांचक यात्रा हम सबके लिए एक यादगार यात्रा बन गई। यहाँ जो हमें नाश्ते, लंच और डिनर में शाकाहारी भोजन दिया गया वह भोजन हमने अपने जीवन में कभी नहीं खाया था। शाकाहारी भोजन में मक्का के उबले हुए भुट्टे, पत्तागोभी, फूलगोभी, गाजर, शलजम, चुकन्दर, शकरकंद, टमाटर, बेर, केला, गन्ना, पपीता, नाशपाती, तरबूज, खरबूज, ड्रेगन फुड, आम, जामफल, मौसंबी, संतरा, अनान्नास, नारियल आदि विभिन्न फल , सब्जी और कंदमूल परोसे गए, जिसे हम सबने बड़े चाव से खाया। यही नहीं फल और सब्जी को विभिन्न पशु-पक्षी की आकृति बनाकर आकर्षक रूप से प्रस्तुत भी किया गया। इन्होंने सबका मन मोह लिया। इससे पता चलता है कि वियतनामी कितने प्रकृति प्रेमी हैं ।

नौका विहार और संगीत निशा –
क्रूज से एक नांव द्वारा हमें समुद्र में ले जाया गया। जहाँ अनेक नौकाए थी, जिसे कयाकिंग कहते है। उसमें आगे-पीछे दो व्यक्ति ही बैठ सकते हैं। लगभग सबने समुद्र के बीच इस नौका विहार का पतवार चलाकर आनंद लिया। रात्रि में क्रूज की छत पर डांस पार्टी हुई। जिसको डांस नहीं आ रहा था, उसे भी सब साथियों ने खूब नचाया। खूब धमाचैकड़ी हुई। डिनर के बाद संगीत निशा का आयोजन किया गया , जिसका संचालन यात्रा के संयोजक और वल्र्ड आयुष फाउंडेशन के अध्यक्ष डाॅ. रंजन वर्मा विशद् ने किया। सर्वश्री डाॅ. मनोज गुप्ता, डाॅ. प्रीति गुप्ता, डाॅ. रश्मि प्रभा, डाॅ. मोनिका जैन, अनिता मित्तल, विनोद अवस्थी, जूनियर प्रणव ने सुमधुर गीत गाकर सबको आनंदित किया। संगीत निशा के बाद सबने देर रात अपने अपने कक्ष में जाकर आराम किया। क्रुज के कक्ष किसी होटल से कम नहीं थे। सबको क्रुज की यात्रा ने मन लुभा लिया। इस प्रकार 20 से 22 अप्रैल तक की हमारी 3 दिन की यात्रा क्रुज पर पूरी हुई।