उज्जैन के स्थायी प्रतीक हैँ पं. सूर्यनारायण व्यास -डॉ एम एन बुच - Samacharline.com
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उज्जैन के स्थायी प्रतीक हैँ पं. सूर्यनारायण व्यास -डॉ एम एन बुच

सन 1965 फरवरी से लेकर सन 1967 अगस्त तक मै उज्जैन का कलेक्टर था। साधारणतः जिले का कलेक्टर शासकीय कार्यों में व्यस्त रहता है और उसका संपर्क अधिकांशतः उन्हीं से होता है जिनका वास्ता शासन से पडता हैं।परन्तु उज्जैन एक अनोखी नगरी है। विश्व की दो सबसे प्राचीन मानव बस्तियों जो आज भी जीवित हैं, भारत में स्थित हैं और वे हैं वाराणसी तथा उज्जैन. ऐसे प्राचीन नगर का कलेक्टर होना बहुत कम लोगों के नसीब में होता है. उज्जैन विश्व का एकमात्र दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग स्थित है महाकालेश्वर, तो काल या समय सम्राट है। सिंहस्थ नाम से प्रसिद्ध महाकुंभ उज्जैन में हर 12 वर्ष में होता है एवं इसकी पवित्रता प्रयाग,हरिद्वार, नासिक के समकक्ष है। उज्जैन हमारी भारतीय संस्कृति तथा परम्परा की धरोहर है. इन सब उपलब्धियों से वहां का कलेक्टर अछूता नहीं रह सकता। इस प्राचीन, पवित्र, अत्यंत ही सभ्य नगरी को सुशोभित करते पंडित सूर्यनारायण व्यास। मैं उन खुशनसीब व्यक्तियों में से था जिन्हें पंडितजी ने अपना सौजन्य दिया, अपनी मित्रता दी, अपना आशीर्वाद दिया।

सूर्यनारायण व्यास का जन्म 2 मार्च १९०२ को हुआ । हो सकता है परमेश्वर ने चाहा कि इस बालक के जन्म से सिंहस्थ को एक नया महत्व दिया जाए। यह तो सत्य है कि १८ वर्ष की उम्र में पंडितजी ने अपनी लेखनी प्रारंभ की, तब से वे सिंहस्थ के प्रेरणा स्तोत्र बने । मुझे आज भी स्मरण है कि सन् 1966-67 में सन् 1968 के सिंहस्थ मेले की योजना बन रही थी, तब स्वयं पंडितजी वे व्यक्ति थे जिन्होंने हम सबमें एक नई जान फूँकी । उस दिन से सिंहस्थ की पूरजोर तैयारी शुरू हुई ।

उज्जैन में क्या नहीं हुआ और क्या नहीं है, जिससे’ पंडितजी का नाम नहीं जुड़ा हो। विक्रम’ विश्व विद्यालय ‘ की स्थापना इस कारण हुई क्योंकि पंडित सूर्यनारायण व्यास ने उसके लिए सतत प्रयास किया । उज्जैन में कालिदास समारोह होता है । जिसकी रूपरेखा पंडितजी की देन है। विक्रम कीर्ति मंदिर की स्थापना पंडितजी के प्रयत्नों से हुई एवं सांस्कृतिक अनुसंधान में कीर्तिमान प्राप्त सिंधिया शोध प्रतिष्ठान के निर्माता भी पं. सूर्यनारायण व्यास ही थे। उन्हीं के प्रयत्नों से कालिदास अकादमी की स्थापना हई।

पं. सूर्यनारायण व्यास ज्योतिष शास्त्री थे ये परन्तु उनका ज्योतिष एक आडम्बर नहीं था, एक व्यापार का जरिया नहीं था। वे बहुत कम भविष्य वाणी करते थे। जब करते थे, तब अत्यंत हीं गंभीरता से करते थे। उनका ज्योतिष शास्त्र भारतीय ज्योतिष विज्ञान पर, आधारित फलित ज्योतिषशास्त्र था एवं पारंपरिक ज्योतिष पर आधारित था।

पं. सूर्यनारायण व्यास एक महान विद्वान थे। उनके साथ बैठना और उनकी वाणी को सुनना एक नवीन शिक्षा प्राप्त करने के बराबर था । सब कुछ होते हुए पंडित सूर्यनारायण व्यास महाकाल के भक्त थे और आज भी महाकाल के बारे में मैं सोच ही नहीं सकता , जिसमें पंडित सूर्यनारायण व्यास की छवि न हो। मै तो उज्जैन से गुजरता हुआ एक राही था . परन्तु पंडित सूर्यनारायण व्यास उज्जैन के स्थायी प्रतीक थे और आज भी हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि पंडितजी की आत्मा को सम्पूर्ण मोक्ष प्राप्त है और वे महाकाल भगवान शिव बगल में बैठे हम साधारण मनुष्यों को अपना आशीर्वाद दे रहे हैं।