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इंदौर (अक्षय जैन)। परंपराएं समय के साथ बदलती हैं, लेकिन शहर की पहचान से जुड़ी विरासत को सुरक्षित रखना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है
इंदौर की अनंतचतुर्दशी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह शहर की सामाजिक स्मृति, सांस्कृतिक परंपरा और सार्वजनिक जीवन का ऐसा हिस्सा है, जिसे कई पीढ़ियों ने अपने अनुभवों से गढ़ा है। आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल मनोरंजन हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, तब भी अनंतचतुर्दशी की रात इंदौर की सड़कों पर उमड़ता जनसैलाब यह बताता है कि आधुनिकता ने परंपराओं की जरूरत खत्म नहीं की है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या हम इस परंपरा को केवल भीड़ और आयोजन तक सीमित कर देंगे?
समय बदल रहा है। नई पीढ़ी की रुचियां बदल रही हैं। मनोरंजन के माध्यम बदल गए हैं। पहले जिस आयोजन को देखने के लिए लोग घंटों इंतजार करते थे, आज उसकी तस्वीर और वीडियो कुछ सेकंड में मोबाइल स्क्रीन पर पहुंच जाते हैं। ऐसे दौर में पारंपरिक आयोजनों को नई पीढ़ी से जोड़ना आयोजकों की चुनौती है। वहीं, इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासन की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं हो सकती।
अनंतचतुर्दशी की रात शहर की सड़कों पर हजारों-लाखों लोगों की मौजूदगी होती है। यातायात, सुरक्षा, स्वच्छता, बिजली, चिकित्सा, आपातकालीन व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन जैसे सवाल स्वाभाविक रूप से सामने आते हैं। प्रशासन को आयोजन से पहले ही रूट प्लान, वैकल्पिक यातायात व्यवस्था, पार्किंग, बैरिकेडिंग, एंबुलेंस कॉरिडोर और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था सार्वजनिक करनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परंपरा के नाम पर अव्यवस्था और आधुनिक व्यवस्था के नाम पर परंपरा दोनों को एक-दूसरे का विरोधी नहीं बनाया जाना चाहिए।
इंदौर की पहचान केवल नए फ्लाईओवर, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम या डिजिटल सेवाओं से नहीं बनेगी। शहर की पहचान उसके बाजारों, मंदिरों, त्योहारों, जुलूसों, सामाजिक आयोजनों और उन सामूहिक स्मृतियों से भी बनती है, जिनसे नागरिकों की भावनाएं जुड़ी होती हैं।
इसलिए अनंतचतुर्दशी को लेकर प्रशासन की सोच ‘आयोजन कैसे निपटाएं’ की नहीं, बल्कि ‘इसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण तरीके से कैसे आगे बढ़ाएं’ की होनी चाहिए।
एआई का दौर हमें भविष्य की तकनीक दे सकता है, लेकिन शहर की सांस्कृतिक आत्मा कोई एल्गोरिद्म तैयार नहीं कर सकता। वह समाज और उसकी पीढ़ियों के साझा अनुभव से बनती है।
इंदौर को तकनीक में आगे बढ़ना है तो बढ़े, लेकिन अपनी परंपराओं की रोशनी साथ लेकर। अनंतचतुर्दशी की रात यही संदेश देती है आधुनिक शहर वही है, जो भविष्य की ओर बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक स्मृति को पीछे नहीं छोड़ता।