विद्यार्थियों को शिक्षित करने से अधिक उन्हें दीक्षित करने की आवश्यकता है – राष्ट्रीय संत बाल योगी श्री उमेश नाथ जी महाराज, ‘कर्मयोगी श्री कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ स्मृति सम्मान 2026’ में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के चार कर्मयोगियों का हुआ सम्मान - Samacharline.com

विद्यार्थियों को शिक्षित करने से अधिक उन्हें दीक्षित करने की आवश्यकता है – राष्ट्रीय संत बाल योगी श्री उमेश नाथ जी महाराज, ‘कर्मयोगी श्री कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ स्मृति सम्मान 2026’ में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के चार कर्मयोगियों का हुआ सम्मान

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उज्जैनमध्य प्रदेशहोम

विद्यार्थियों को शिक्षित करने से अधिक उन्हें दीक्षित करने की आवश्यकता है – राष्ट्रीय संत बाल योगी श्री उमेश नाथ जी महाराज, ‘कर्मयोगी श्री कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ स्मृति सम्मान 2026’ में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के चार कर्मयोगियों का हुआ सम्मान

उज्जैन। समाज को दिशा देने का कार्य केवल उपदेशों से नहीं, बल्कि ऐसे कर्म और संस्कारों से होता है, जो आने वाली पीढ़ियों के जीवन में अपना प्रभाव छोड़ते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने जीवन को समाजहित, शिक्षा, सेवा और मानवीय मूल्यों के लिए समर्पित कर देता है, तो उसका जीवन स्वयं समाज के लिए दिशा-सूचक बन जाता है। स्व. कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ जी का जीवन भी ऐसा ही था, जिन्होंने शिक्षा को समाज निर्माण का माध्यम बनाया, गांधीवादी विचारों को अपने जीवन में उतारा तथा सामाजिक सरोकारों को अपने कर्म का आधार बनाया। विद्यार्थियों को केवल शिक्षित करने से अधिक उन्हें दीक्षित करने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा के साथ उनके भीतर कर्तव्य, संस्कार और समाज के प्रति दायित्व का भाव विकसित हो। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में समर्पित भाव से कार्य करने वाली विभूतियों का सम्मान करना वास्तव में कर्म और सेवा की उस परंपरा को नमन करना है।

उक्त विचार राष्ट्रीय संत बाल योगी श्री उमेश नाथ जी महाराज, पीठाधीश्वर, श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम, उज्जैन एवं राज्यसभा सांसद ने भारतीय ज्ञानपीठ, माधव नगर में स्व. कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ की जयंती के अवसर पर आयोजित ‘कर्मयोगी श्री कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ स्मृति सम्मान 2026’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि समाज तभी सशक्त बनता है, जब व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे। शिक्षा, सेवा और संस्कार मिलकर ऐसे नागरिक तैयार करते हैं, जो स्वयं आगे बढ़ने के साथ समाज को भी आगे ले जाते हैं। स्व. कुलश्रेष्ठ जी का जीवन इसी भावना का प्रेरक उदाहरण है।

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री प्रेम नारायण नागर ने कहा कि स्व. कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ जी का जीवन स्वतंत्र भारत के निर्माण, राष्ट्रसेवा और सामाजिक प्रतिबद्धता की प्रेरणादायी यात्रा रहा। शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्रहित के प्रति उनके समर्पण ने उनके व्यक्तित्व को विशिष्ट बनाया। सौ वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके श्री नागर जी ने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे कर्मयोगी जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझना चाहिए।

इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विशिष्ट विभूतियों को कर्मयोगी सम्मान से अलंकृत किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र के कर्मयोगी के रूप में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो. शिव शंकर मिश्र को सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए प्रो. मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना उनके लिए सदैव साधना का विषय रहा है और यह सम्मान उन्हें इस दिशा में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।

प्रशासन के कर्मयोगी के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ आई.ए.एस. डॉ. अशोक कुमार भार्गव को सम्मानित किया गया। आपने बताया कि प्रशासन जनसेवा का माध्यम है और स्वर्गीय कुलश्रेष्ठ जी ने भी जनसेवा को ही अपना लक्ष्य बनाया था। उनके साथ कई गांधीवादी गतिविधियों में भागीदारी करने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ। ये सभी स्मृतिया एक प्रेरणा है।

न्याय के क्षेत्र के कर्मयोगी के रूप में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. अनिल वर्मा को सम्मानित किया गया। न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि न्याय के साथ राष्ट्र और समाज के प्रति दायित्व का भाव जीवन को व्यापक अर्थ प्रदान करता है। स्व कुलश्रेष्ठ जी का जीवन सभी के लिए प्रेरणा है।

कला के क्षेत्र के कर्मयोगी के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी श्री सतीश दवे को सम्मानित किया गया। श्री दवे ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदना, सामाजिक चेतना और नई पीढ़ी को दिशा देने का सशक्त माध्यम है। स्व. कृष्ण मंगल सिंह को कुलश्रेष्ठ जी ने भी हमेशा कला और कलाकारों को प्रोत्साहित किया है।

अभिनंदन पत्रों का वाचन इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्री पुष्कर बाहेती, एडवोकेट श्री विश्वास शर्मा, रिचा विचार मंच के अध्यक्ष श्री महेश ज्ञानी एवं चित्रगुप्त धाम के ट्रस्टी श्री चंद्र मोहन श्रीवास्तव द्वारा किया गया। सम्मान की बेला में संस्थान प्रमुख श्री युधिष्ठिर कुलश्रेष्ठ के साथ एडवोकेट योगेश व्यास, मध्य प्रदेश स्टेट बार एसोसिएशन के सदस्य संदीप मेहता, डॉ. चंदर सोनाने, डॉ. सुमित सकरगाए, डॉ. विनोद बैरागी, श्रीमती अमृता गोडबोले, श्रीमती शिवा बंसल, श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव, श्रीमती अनीता गोयल एवं सुश्री लक्ष्मी शुक्ला विशेष रूप से सहभागी रहे।

स्वागत उद्बोधन संस्थान की निदेशिका श्रीमती अमृता कुलश्रेष्ठ ने दिया।

इस अवसर पर निदेशक प्रेमचंद सृजन पीठ श्री मुकेश जोशी, डॉ. प्रेम छाबड़ा, श्री किशोर रावल, डॉ. पिलकेंद्र अरोरा, डॉ. शैलेंद्र पाराशर, प्रो. बृज किशोर शर्मा, डॉ. ओ. पी. पालीवाल, डॉ. एस. एन. पांडे, श्री रामेश्वर अंजना, श्री उदय सिंह चंदेल, श्री प्रकाश त्रिवेदी, श्री शिव नायर, श्री सोनू गहलोत, डॉ. हरीश कुमार सिंह, श्री अक्षय अमेरिया, डॉ. चंद्र शर्मा, डॉ. पुष्पा चौरसिया, श्री संतोष सुपेकर, श्रीमती सीमा देवेंद्र जोशी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अतिथि स्वागत डॉ. नीलम महाडिक, श्रीमती रचना श्रीवास्तव, डॉ. रश्मि शर्मा, सुश्री जयनित बग्गा, डॉ अमिता मंडलोई एवं श्रीमती मयूरी बैरागी द्वारा निभाया गया।
कार्यक्रम का संचालन एकेडमिक डायरेक्टर डॉ. गिरीश पंड्या ने किया तथा आभार जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री उदय सिंह बेहरावत ने माना।

तीन दिवसीय खादी प्रदर्शनी व सेल का शुभारंभ

भारतीय ज्ञानपीठ, माधव नगर संस्थान परिसर में खादी ग्रामोद्योग विकास मंडल, उज्जैन के सहयोग से तीन दिवसीय खादी प्रदर्शनी एवं सेल का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव ने दीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया तथा प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष श्री संदीप कुलश्रेष्ठ सहित खादी ग्रामोद्योग विकास मंडल, उज्जैन के पदाधिकारी उपस्थित थे। यह प्रदर्शनी एवं सेल दिनांक 26, 27 एवं 28 सितंबर तक चलेगी। प्रदर्शनी का समय प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से सायं 6 बजे तक रहेगा, जिसमें खादी एवं ग्रामोद्योग की वस्तुओं पर 10 से 30 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जाएगी।