आयुष्मान योजना के नाम पर छत्तीसगढ़ में इलाज का धंधा उजागर, मध्यप्रदेश में भी इसी प्रकार होनी चाहिए अस्पतालों की जाँच -डॉ. चन्दर सोनाने - Samacharline.com
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आयुष्मान योजना के नाम पर छत्तीसगढ़ में इलाज का धंधा उजागर, मध्यप्रदेश में भी इसी प्रकार होनी चाहिए अस्पतालों की जाँच -डॉ. चन्दर सोनाने

केन्द्र सरकार की गरीबों के लिए अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही है। उसमें एक प्रमुख योजना है आयुष्मान योजना। इस योजना में गरीबों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता। बल्कि, सरकारी और निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के कार्ड पर उसका 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। यह सुविधा प्रति परिवार प्रति वर्ष के लिए है। गरीबों के लिए यह योजना एक वरदान है। किन्तु जब इसके नाम पर ही लोग धंधा करने लगे तो योजना को पलिता लग जाता है।
छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना के संबंध में लगातार आ रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इस निर्णय के तहत सूची में दर्ज निजी अस्पतालों में से चिन्हित अस्पतालों की सघन जाँच की गई। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव, कोरबा और सरबुजा तक फैली इस कार्यवाही ने अनेक सवाल खड़े कर दिए। चिन्ह्ति कुल 17 अस्पतालों को जाँच के दायरे में रखा गया और उनकी सघन जाँच की गई।
                          इस जाँच में चौंकाने वाले अनेक परिणाम सामने आए। रायपुर के एक अस्पताल की जाँच में 28 सितंबर को कुछ ही समय के भीतर 19 मरीजों के छुट्टी किए जाने का तथ्य सामने आया। इनमें 18 मरीज ओडिशा के बताए गए। अगले ही दिन जाँच के दौरान योजना के केवल सात मरीज भर्ती मिले, जबकि अस्पताल में कुल मरीजों की संख्या करीब 20 थी । कुछ मरीज सामान्य दर्द जैसी शिकायतों के साथ भर्ती पाए गए और जाँच दल ने उनमें से कुछ को भर्ती किए जाने की स्थिति में नहीं माना।
                        इससे भी गंभीर सवाल तब उठता है, जब आईसीयू में भर्ती बताए गए मरीज से संबंधित अभिलेख ही मौके पर उपलब्ध नहीं मिले। मरीज अस्पताल में है, लेकिन उसकी भर्ती की फाइल नहीं है। यह किसी सामान्य प्रशासनिक चूक से आगे का विषय है। मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि जाँच में यह आरोप सामने आया कि आयुष्मान कार्ड वाले गरीब लोगों को कमीशन का लालच देकर दूसरे स्थानों से लाया जा रहा था। उन्हें बिना गंभीर बीमारी के अस्पताल में भर्ती दिखाया जाता, हाथ में कैनुला और पट्टियाँ लगाई जाती और फिर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये के दावे तैयार किए जाते। इस गोरखधंधे के पीछे मरीज जुटाने वाले बिचौलियों, दस्तावेज तैयार करने वालों और भुगतान की निगरानी करने वाली व्यवस्था की भूमिका भी स्पष्ट सामने आ रही है।
  छत्तीसगढ़ सरकार ने तो हिम्मत करके वहां के अस्पतालों की जाँच कर उन शिकायतों की पुष्टि कर ली, जो उन्हें लगातार मिल रही थी। इस जाँच के बाद छत्तीसगढ़ सरकार कुछ कठोर कदम भी उठा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह काम निःसंदेह सराहनीय और अनुकरणीय है।
  मध्यप्रदेश में भी समय-समय पर आयुष्मान योजना में हो रहे घपलों की खबरें मीडिया में आती रहती है। कुछ शिकायतें तो छत्तीसगढ़ राज्य में आई शिकायतों के समान ही है। किन्तु कुछ शिकायतें नई भी है। जैसे आयुष्मान योजना के कार्डधारी को भर्ती तो कर लिया जाता, किन्तु उसका इलाज और उस पर हो रहे खर्च की जानकारी मरीज और उसके परिवार को नहीं दी जाती। अब तक हुए खर्च की जानकारी मांगने पर मरीज और परिवार को कहा जाता है कि आप तो बस हस्ताक्षर कर दो, आपको पैसे नहीं देने हैं।
आयुष्मान योजना में हो रहे घपले का एक उदाहरण इंदौर में सामने आया है। धार के एक 70 वर्ष से अधिक के वरिष्ठजन को जब उसके घुटनों के इलाज के लिए इन्दौर के अस्पताल में भर्ती किया गया तो उसके घुटने का ऑपरेशन कर दिया गया और बताया गया कि घुटने में जो कटोरी का उपकरण लगना है वह सस्ता है। हमें आयुष्मान योजना में वही लगाना है। यदि आप इससे अच्छा विदेशी जॉनसन कंपनी का कटोरी का उपकरण लगाना चाहते है तो अलग से 35 हजार रूपए देने होंगे। इसी प्रकार एक और उपकरण बताया गया, उसके भी 15 हजार रूपए बताए गए। इस प्रकार उससे अच्छी कंपनी के उपकरणों के नाम पर नकद 50 हजार रूपए अलग से ले लिए गए। यही नहीं जब उसने कुल कितना खर्चा आया ? यह पूछा तो उसे कोई खर्चा नहीं बताया गया।
मध्यप्रदेश में आ रही अनेक शिकायतों में यह भी शिकायतें आ रही हैं कि सरकारी अस्पतालों से मरीज को निजी अस्पताल बहकाकर ले जाते हैं। इसके लिए सरकारी अस्पताल के बाहर निजी अस्पतालों की एम्बुलेंस तैयार खड़ी रहती है। इसमें अस्पतालकर्मियों की मिली भगत होती है। इसके लिए उन्हें अच्छा कमीशन मिलता है। यही नहीं सामान्य बीमारियों के लिए हुए भर्ती मरीज को भी गंभीर बीमारी बताकर उसका ऑपरेशन कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, जिसमें मरीज का ऑपरेशन जरूरी नहीं है, वहाँ भी मरीज का ऑपरेशन कर आयुष्मान योजना के नाम से कुछ अस्पतालों ने लूट मचा रखी है।
         इसलिए जरूरी है कि अब मध्यप्रदेश सरकार भी छत्तीसगढ़ सरकार की तरह आयुष्मान योजना और इलाज के नाम पर हो रहे धंधे की जाँच के लिए विशेष दल गठित करें। जिन अस्पतालों से लगातार शिकायत आ रही है, सबसे पहले वहाँ जाँच के लिए छापा डाला जाना चाहिए। प्रदेश के प्रत्येक संभाग के संभागीय मुख्यालयों पर तो प्रथम चरण में जाँच दलों को भेजा ही जाना चाहिए, ताकि आयुष्मान योजना के नाम पर हो रहे धंधे को बंद किया जा सके। यह योजना जिस उद्देश्य के तहत बनी है उसके पालन के लिए और गरीबों का सही मायने मे निःशुल्क इलाज मिल सके इसके लिए यथाशीघ्र जाँच दलों को निजी अस्पतालों में भेजा जाना चाहिए। जिन अस्पतालों में जाँच के दौरान घपले पाए जाएँ उसका नाम आयुष्मान योजना की सूची में से हटा देना चाहिए। यही नहीं ऐसे अस्पतालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। मध्यप्रदेश के मुखिया विकास पुरूष डॉ. मोहन यादव है। उनसे अपेक्षा है कि वे मध्यप्रदेश में भी छत्तीसगढ़ की तरह जाँच दल बनाकर आयुष्मान योजना के नाम पर हो रहे इलाज के धंधे को बंद करें।