संवैधानिक मर्यादा और जनसंवेदना के नए प्रतिमान गढ़ेंगे डॉ. ढाल सिंह बिसेन? - Samacharline.com

संवैधानिक मर्यादा और जनसंवेदना के नए प्रतिमान गढ़ेंगे डॉ. ढाल सिंह बिसेन?

प्रकाश त्रिवेदी उत्तराखंड के राज्यपाल के...

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देशप्रकाश त्रिवेदीहोम

संवैधानिक मर्यादा और जनसंवेदना के नए प्रतिमान गढ़ेंगे डॉ. ढाल सिंह बिसेन?

प्रकाश त्रिवेदी

  • उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में एक संजीदा राजनेता से संवैधानिक दायित्वों के कुशल निर्वहन की अपेक्षा

राजनीति में किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान केवल उसके पद, राजनीतिक प्रभाव या चुनावी सफलता से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन किस दृष्टि, संवेदनशीलता और नैतिक प्रतिबद्धता के साथ करता है। लोकतंत्र में ऐसे व्यक्तित्वों का विशेष महत्व है, जो राजनीतिक सक्रियता के साथ गंभीरता, ईमानदारी और प्रशासनिक दक्षता को भी अपने आचरण का हिस्सा बनाते हैं। डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक व्यक्तित्व इसी कसौटी पर चर्चा की अपेक्षा करता है।

मध्यप्रदेश की राजनीति में डॉ. ढाल सिंह बिसेन को एक संजीदा, ईमानदार और कुशल प्रशासनिक क्षमता वाले राजनेता के रूप में देखा जाता है। उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका को लेकर सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षा यही होगी कि वे अपने अनुभव और कार्यशैली के माध्यम से संवैधानिक मर्यादाओं, संस्थागत गरिमा और आमजन के प्रति संवेदनशीलता का ऐसा संतुलन प्रस्तुत करें, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करे।

राज्यपाल का पद सामान्य राजनीतिक पदों से अलग है। यह न तो सत्ता की राजनीति का विस्तार है और न ही किसी दल विशेष के हितों की अभिव्यक्ति का माध्यम। राज्यपाल भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेकर उस संवैधानिक व्यवस्था के संरक्षक की भूमिका निभाते हैं, जिसमें संघीय संतुलन, निर्वाचित सरकारों की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा का विशेष महत्व है। इस पद की गरिमा इसी में है कि व्यक्ति की राजनीतिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर संवैधानिक दायित्व सर्वोपरि रहें।

डॉ. बिसेन के सामने भी यही सबसे महत्वपूर्ण कसौटी होगी। मध्यप्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों और प्रशासनिक अनुभवों से अर्जित समझ उत्तराखंड जैसे महत्वपूर्ण राज्य में उनके लिए उपयोगी हो सकती है। लेकिन राज्यपाल के रूप में सफलता का वास्तविक आकलन इस आधार पर होगा कि वे संविधान की भावना को कितना महत्व देते हैं, राज्य की निर्वाचित सरकार के साथ संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप किस प्रकार समन्वय स्थापित करते हैं और राज्य की जनता की आकांक्षाओं को किस संवेदनशीलता से समझते हैं।