सतना हाफ मैराथन ने नगर को बनाया ‘पिंक सिटी’, 22 राज्यों के 5,029 धावकों ने दिखाया दम
श्रीमती शांति मिश्रा जन्म शताब्दी को...
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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत...
राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज...

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माता-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना हमारा दायित्व है।शहडोल में तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाली माता – बहनों को बोनस के माध्यम से आर्थिक मदद की जा रही है। किसानों को भी हम आर्थिक रूप से सशक्त कर रहे हैं। बहनों, किसानों, गरीबों को दी जा रही छोटी – छोटी राशि आर्थिक सहायता, समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण है। माता-बहनों को हमारी सरकार अब तक 65 हज़ार करोड़ रुपये की राशि दे चुकी है। देश में मध्यप्रदेश सरकार एकमात्र ऐसी सरकार है जो किसानों के सशक्तिकरण के साथ ही पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को भी प्रोत्साहित कर रही है। हमारी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर बने मकानों की निःशुल्क रजिस्ट्री करने की पहल की है। इससे ग्रामीण उस मकान पर बैंक से ऋण ले सकेंगे। ग्रामीणों में स्वामित्व योजना के प्रति उत्साह और आशा का भाव है। अब अपने व्यापार को बढ़ाने या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए ग्रामीण व्यक्ति अपने मकान पर ऋण ले सकेंगे, इससे अर्थव्यवस्था और सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार भोपाल में आयोजित एक मीडिया समूह के कार्यक्रम “सुशासन संवाद 3.0′ में व्यक्त किए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में लाड़ली बहना योजना, जनकल्याण और विकास के बीच वित्तीय संतुलन, सिंहस्थ 2028 को वैश्विक आध्यात्मिक आयोजन बनाने के लिए जारी तैयारी और अंर्तराज्यीय संबंधों पर चर्चा की।
देश में सबसे अच्छी शिक्षा व्यवस्था अब मध्यप्रदेश की है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सांदीपनि विद्यालय के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का काम किया है। प्रदेश में एक समय वह भी था जब स्कूल में बैठने के लिए टाट- पट्टी तक की व्यवस्था नहीं थी। आज सांदीपनि विद्यालय आधुनिक सुविधाओं, बहुमंजिला भवनों और बेहतर शैक्षणिक संसाधनों के साथ शिक्षा का आदर्श मॉडल बन रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इन विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वे भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा तथा राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को आत्मसात करें। गर्व का विषय है कि देश में सबसे अच्छी शिक्षा व्यवस्था अब मध्यप्रदेश की है।
शिक्षा, ज्ञान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक थे आचार्य सांदीपनि
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आचार्य सांदीपनि का नाम भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता से जुड़ा है। सांदीपनि विद्यालयों के नामकरण के पीछे यही भाव है कि विद्यार्थियों के बीच मित्रता, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा सदैव जीवंत रहे। आचार्य सांदीपनि शिक्षा, ज्ञान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक थे। आचार्य सांदीपनि का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण का आधार भी है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से संपूर्ण बुंदेलखंड को लाभ मिलेगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंर्तराज्यीय संबंधों पर चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का भाव है कि राज्यों में परस्पर सौहार्दपूर्ण प्रतिस्पर्धा होना चाहिए। राज्य सरकार ने पूरे बुंदेलखंड की बेहतरी के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार के साथ केन-बेतवा लिंक परियोजना का एक लाख करोड़ रुपए का प्लान बनाया है, इससे पूरे बुंदेलखंड का भला होगा।
सिंहस्थ 2028 के लिए जारी हैं तैयारियां
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के दौरान आवागमन के लिए हर संभव प्रबंध किए जा रहे हैं। उज्जैन की आबादी तो आठ-दस लाख है, सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं का आना संभावित है, आने-जाने के मार्ग, घाट, स्नान, दर्शन आदि का तद्नुसार प्रबंधन किया जा रहा है। सभी व्यवस्थाएं, समाज के वर्तमान परिवेश और आवश्यकताओं के अनुरूप की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है। महाकाल महालोक बनने के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। गत वर्ष सात करोड़ लोग उज्जैन आए इससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बदल रही हैं, इसी क्रम में सारी व्यवस्थाएं भी स्थाई रूप से की जा रही हैं।
देश और समाज के सरोकारों पर केंद्रित रहा आयोजन
कार्यक्रम के आरंभ में पांचजन्य संपादक श्री हितेश शंकर ने कहा कि देश में प्रारंभ से ही पत्रकारिता का आधार राष्ट्र की चिंता रहा है। इसी का परिणाम रहा कि अधिकांश स्वतंत्रता सेनानी पत्रकारिता से जुड़े । पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर जैसी पत्रिकाओं का सृजन किया गया। गर्व का विषय है कि दोनों का ही संबंध मध्यप्रदेश से रहा। उन्होंने कहा कि आज का आयोजन देश और समाज के सरोकारों पर केंद्रित है। सुशासन प्रशासन सुशासन पर चर्चा के दौरान लोकमाता अहिल्याबाई प्रतीक स्वरूप हम सबके मन और विचारों में विद्यमान हैं।