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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा...
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नागदा, नि.प्र.। दीपावली पर्व की धार्मिक परंपराओं में नरक चतुर्दशी का विशेष महत्व है। यह दिन जहां भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है, वहीं पितरों की शांति, यम उपासना, तर्पण एवं दीपदान के लिए भी विशेष फलदायी माना गया है। इसी धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से नागदा में लगातार कई वर्षों से चली आ रही अनूठी परंपरा के तहत इस वर्ष भी 7 नवंबर, शनिवार को प्रातः 5 से 6.30 बजे तक चंबल तट स्थित श्री मुक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सामूहिक दीपयादि श्राद्ध, यम तर्पण एवं दीपदान का आयोजन किया जाएगा।
आयोजन वैदिक कर्मकांड आचार्य पंडित अजय पंड्या एवं पंडित दीपक पंड्या के मार्गदर्शन में संपन्न होगा। कार्यक्रम संयोजक पंडित निलेश मेहता ने नगर के समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों, सनातन धर्मावलंबियों एवं श्रद्धालु परिवारों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर इस पुनीत आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।
पितरों के निमित्त दीपदान, प्रायश्चित एवं सद्गति की कामना
आचार्य पंडित अजय पंड्या एवं पंडित दीपक पंड्या ने बताया कि शास्त्रों में मनुष्य के शुभ-अशुभ कर्मों को उसके सुख-दुख और आगामी गति का आधार माना गया है। गरुड़ पुराण में कर्मों के अनुसार मिलने वाले फलों, स्वर्ग-नरक की अवधारणा तथा मृत्यु के उपरांत जीव की गति का विस्तार से वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि जीवनकाल में जाने-अनजाने हुए कुछ ऐसे कर्म भी होते हैं, जिनका प्रायश्चित व्यक्ति स्वयं नहीं कर पाता। ऐसे में पितरों के निमित्त श्रद्धा एवं विधि-विधान से किए गए धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण और दीपदान को उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने तथा उनकी शांति एवं सद्गति की कामना का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है।
इसी भाव के साथ दीपयादि श्राद्ध की यह विशेष परंपरा प्रारंभ की गई है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के ब्रह्ममुहूर्त में यम धर्मराज के निमित्त दीपदान, पितृ तर्पण एवं विधिवत श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस अनुष्ठान में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ ही उनके निमित्त दीप प्रज्वलित कर उनकी आत्मिक शांति एवं उत्तम गति की प्रार्थना की जाती है।
अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला पर्व है दीपदान
नरक चतुर्दशी पर दीपदान केवल दीप प्रज्वलित करने की परंपरा नहीं, बल्कि यह पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और सनातन संस्कारों के संरक्षण का भी प्रतीक है। यमदीप का धार्मिक महत्व अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और जीवन में मंगल की कामना से जुड़ा है। वहीं पितरों के निमित्त प्रज्वलित दीप श्रद्धा, स्मरण और आध्यात्मिक प्रकाश का संदेश देता है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों, पारिवारिक संस्कारों और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का भी अवसर है।
श्रद्धालु अपने साथ लाएं पूजन सामग्री एवं गर्म वस्त्र
आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालु चार गन्ने, छह जल की छोटी कुल्हड़, एक छोटा चांदी का दीपक, पांच तांबे के दीपक, 16 मिट्टी के दीपक, लंबी एवं गोल रुई की बत्तियां, दो छोटी थालियां, एक बड़ी परात, एक लोटा, पानी की बाल्टी, काले तिल, जौ, अबीर, चंदन, हल्दी, रोली-कुमकुम, फूल, मिठाई, धानी, बताशे एवं छह दोने साथ लेकर आएं। इसके अतिरिक्त पितरों के निमित्त दीपोत्सव मनाने के लिए फुलझड़ी, चकरी एवं अनार भी साथ ला सकते हैं।
प्रातःकाल ठंड को देखते हुए श्रद्धालुओं से शॉल, स्वेटर, दरी, आसन एवं ऊनी टोपी साथ लाने का आग्रह किया गया है। सभी सहभागी प्रातः 4.30 बजे तक मुक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर में पहुंचें, ताकि निर्धारित समय पर विधिवत पूजन प्रारंभ किया जा सके।
पितृ स्मरण के इस पुनीत आयोजन में सहभागी बनने की अपील
आयोजकों ने नगर एवं आसपास के क्षेत्र के सभी समाजजनों, युवाओं, मातृशक्ति एवं धर्मप्रेमी परिवारों से आग्रह किया है कि वे केवल आयोजन को देखने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए इस सामूहिक धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बनें। यह अवसर अपने पूर्वजों का स्मरण करने, परिवार की सुख-शांति की कामना करने और आने वाली पीढ़ियों तक सनातन परंपराओं को पहुंचाने का है। सामूहिक सहभागिता से यह धार्मिक आयोजन और अधिक व्यापक एवं प्रेरणादायी बनेगा। आयोजन के संबंध में पंडित अजय पंड्या, पंडित दीपक पंड्या 9713708673, 9770370629 एवं कार्यक्रम संयोजक पंडित निलेश मेहता 9826411331 से संपर्क किया जा सकता है। जानकारी ब्राह्मण समाज नागदा युवा संस्कार परिवार के संयोजक निलेश मेहता ने दी।