Dr. Mohan Yadav: The Revival of the Vikramaditya Era -Pandit Mustafa Arif
Prime Minister Narendra Modi has praised this initiative. Dr. Yadav repeatedly emphasizes...
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भोपाल। अबकी बार 200 पार का नारा लगा रही भाजपा को घनघोर सत्ता विरोधी लहर और वर्तमान विधायकों के खिलाफ गहरी नाराजगी जो मतदाता और कार्यकर्ताओं दोनों में है,के कारण संघ नेतृव का कोपभाजन बनना पड़ रहा है। सूचनाओं, कवायदों और गहन चिंतन के बाद अब संघ ने भाजपा को उम्मीदवारों के चयन के लिए कड़ा संदेश दिया है कि उनकी “टोली”की सहमति के बिना किसी को भी चुनाव नही लड़ाया जाएगा।
संघ की उच्चस्तरीय टोली ही अब सभी नाम फाईनल करेंगीं।
भाजपा के अंतःपुर से रिस रही खबरों के अनुसार संघ के आंतरिक सर्वे और जिला स्तर पर प्रचारकों-विस्तारकों की रायशुमारी में आए फीडबैक ने संघ के अलंबरदारों की नींद उड़ा दी है। सपाक्स और नोटा की चुनोतियाँ के बीच वर्तमान विधायकों के प्रति गहरी नाराजगी को देखकर संघ ने अपनी भूमिका में बदलाव कर लिया है। पहले की तरह बैकअप की भूमिका छोड़कर अब संघ ही भाजपा जिताने के लिए सब कुछ करने वाला है।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते जबलपुर में संघ के क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह,संगठन महामंत्री सुहास भगत और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह की बैठक में संघ ने अपने कड़े तेवर दिखाकर जता दिया है कि अब राजनीतिक नेतृत्व को केवल संघ आदेश का पालन ही करना है।
सरकार बनाने की जी तोड़ कवायद में लगे मुख्यमंत्री ने बैगर ना नकुर किए संघ की शरण स्वीकार कर ली है।
भाजपा में बने नए समीकरण के बाद बड़े पैमाने पर वर्तमान विधायकों के टिकट कटने का रास्ता साफ हो गया है। नेताओं की सिफारिशों को अब तव्वजों नही मिलने वाली है।
इस कवायद में खतरा केवल इतना है कि निर्णयन क्षमता से लैस कुछ संघ अधिकारी निजी,आग्रह-दुराग्रह के चलते अपने तई ख़राब निर्णय भी करा सकते है।
भाजपा में दावे-दबदबे और भाई साहबों की निकटता रखने वाले खुश भी है और दुखी भी।
बहरहाल विधानसभा चुनाव से ही 2019 में मोदी सरकार का भविष्य तय होना है लिहाजा सब तरह के लिहाज को किनारा कर टिकट दिये जाने की जरूरत है।
प्रकाश त्रिवेदी@samacharline.com