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मुरादाबाद। भारतीय रेलवे के इंजीनियरों की टीम ने हाईस्पीड इंजन तैयार किया है। इसकी खास बात यह है कि इसमें कैमरे लगाए गए हैं, जिसके चलते चालक को दूर तक रास्ता साफ नजर आएगा। इंजन का ट्रायल मुरादाबाद रेल मंडल में किया जाना प्रस्तावित है।
केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया के नारे के बाद रेलवे के इंजीनियरों ने अपने हुनर का कमाल दिखाना शुरू कर दिया है। यह इंजन 80 वैगन वाली मालगाड़ी को भी 200 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ा सकता है। चढ़ाई वाले स्थान पर दो इंजन लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह इंजन अकेले ही लंबी मालगाड़ी को लेकर चढ़ाई पर चढ़ जाएगा।
इंजन को ऐसा बनाया गया है कि तेज गति पर चलने के बाद भी हवा इंजन की रफ्तार को कम नहीं कर पाएगी। चालकों को दूर तक देखने में आसानी हो, इसके लिए बाहर चार शक्तिशाली कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के जरिये केबिन में लगी स्क्रीन पर दूर तक रास्ता साफ दिखाई देगा।
चालक को बस केबिन में बैठकर स्क्रीन पर नजर रखनी होगी। इन कैमरों के जरिये टूटी लाइन भी दिखाई दे जाएगी। इससे चालक को इंजन चलाते समय आगे देखने की आवश्यकता नहीं होगी। इंजन के अंदर छह कैमरे लगाए गए हैं। इनके जरिये चालक मशीन में खराबी, शॉट सर्किट देख पाएंगे।
हाईस्पीड ट्रेन-18, डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलने के साथ आधुनिक सुविधा वाला एलएचबी (लिंक हाफमेन बुश) कोच तैयार किए हैं। इसके बाद चितरंजन रेल इंजन कारखाने के इंजीनियरों ने आधुनिक एयरोडायनमिक इंजन तैयार किया है।
आरडीएसओ करेगा ट्रायल
हाईस्पीड इंजन का रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम को ट्रायल करना है। ट्रायल में सफल होने के बाद इस इंजन से ट्रेन और मालगाड़ी का संचालन किया जाएगा।
मेमू के ट्रायल के बाद हाईस्पीड इंजन का ट्रायल किया जाना प्रस्तावित है। कब से ट्रायल किया जाएगा, यह आरडीएसओ की टीम को निर्धारित करना है। –अजय कुमार सिंघल, मंडल रेल प्रबंधक, मुरादाबाद