24 घंटे के अंदर एसडीएम की मौजूदगी में मजदूरों की मेहनताना का भुगतान किया वन विभाग ने - Samacharline.com
उज्जैनदेवासभोपालमध्य प्रदेश

24 घंटे के अंदर एसडीएम की मौजूदगी में मजदूरों की मेहनताना का भुगतान किया वन विभाग ने


24 घंटे के अंदर एसडीएम की मौजूदगी में
मजदूरों की मेहनताना का भुगतान किया वन विभाग ने

देवास जिले के कन्नौद तहसील के ग्राम मनासा से रविवार देर रात्रि को कुछ मजदूरों ने कलेक्टर कार्यालय के प्रांगण में डेरा डाल दिया था। उन मजदूरों की मांग थी की उन्हें मेहनताना नहीं दिया गया था। जबकि मामले को लेकर वन विभाग के रेंजर ने बताया की इन मजदूरों को 34 हजार रूपये किश्तों में दिये जा चुके हैं। इस बात की पुष्टि इन मजदूरों ने भी की है। वहीं बाकी बचा मेहनताना का रूपया इन मजदूरों को दिया नहीं गया था, जिसके चलते इन्होनें गत दिवस एसडीएम से चर्चा की थी, जिस पर एसडीएम ने इन्हें सांत्वना देते हुए का था की आपको जल्द ही बचा भुगतान दे दिया जावेगा। इस मामले को मीडिया ने बड़ी तेजी से उठाया और नतीजन मंगलवार सुबह करीब 9 बजे वन विभाग के अधिकारी ने रूपये देने के लिये इन्हें कार्यालय पर बुलाया तो यह लोग गये भी लेकिन इस बात पर अड़ गये की बाकी बचा पेमेंट सिर्फ एक ही आदमी को दे देंवे वह बाकी लोगों को दे देगा। लेकिन विभागीय अधिकारी ने कह दिया की जैसा नियमानुसार होता आया है वैसे ही भुगतान किया जा सकता है। वहीं ये मजदूर पुन: एसडीएम के पास पंहुचे जहां उन्होनें इन्हें वन विभाग में जाने को कहा वहां दोपहर में एसडीएम पंहुचे और भुगतान करने के लिये अधिकारीयों को कहा जिस पर यहां पर आये इन मजदूरों ने अधिकारीयों की नहीं सुनी और अपनी बात पर अडिग रहते हुए कहा की पूरा भुगतान मौजूद 12 लोगों को दे दिजिए। बाकी बचे मजदूरों को भुगतान वे लोग दे देंगे, क्योंकि बाकी 6 मजदूर गांव चले गये हैं। यहां पर विभाग ने यही कहा की आप मौजूद लोगों को भुगतान दे देते हैं बाकी बचे 6 मजदूरों को आप वहां से संपर्क कर बुला लिजिए हम उन्हें भी पेमेन्ट कर देंगे। लेकिन विभाग व मजदूरों का तालमेल नहीं बैठ पाया और मजदूर वहां से नाराज होकर चले गये। लेकिन कुछ देर बाद फिर से मजदूर यहां पर आये और उन्हें सारा भुगतान इस शर्त पर किया गया की पहले इस बात की पुष्टि करें की यह लोग बाकी के लोगों को भुगतान दे देंगे। इस हेतु मजदूरों से तहसील में जाकर एफईटडेफिट बनवाया फिर पूरा भुगतान कर रवाना किया।
सोमवार सुबह मजदूरों ने बताया की वन विभाग के रेंजर ने पौधे रोपने के लिए गड्ढे इन मजदूरों से खुदवाए और उन्हें उनका मेहनताना नहीं दिया और वहां से रवाना कर दिया। इससे पहले जो भी रूपया विभागीय अधिकारी ने दिया वह भी सिर्फ किश्तों में दिया था। इस मामले को लेकर एसडीएम ने सांत्वना देते हुए कहा था की जल्द ही मजदूरों को उनका बचा भुगतान दे दिया जावेगा। हाँलाकि पूरा मामला तब तेजी से उठा जब मीडियाकर्मीयों ने हस्तक्षेप कर मजदूरों को भुगतान कराने को लेकर खबरें प्रकाशित की थी। जिसका असर निर्णायक साबित हुआ और मजदूरों का भुगतान मंगलवार को देने की बात विभाग ने कह दी। जिस पर मंगलवार सुबह से लेकर दोपहर 3 बजे तक विभागीय अधिकारी ने पूरा प्रयास किया लेकिन पेमेंट लेने के लिये मजदूरों का कहना था की हमें पूरे 18 लोगों का भुगतान दे देवें। यहां पर वर्तमान में 12 लोग मौजूद हैं बाकी बचे 6 लोगों को वह उनके गांव जाकर दे देंगे। लेकिन विभाग का मानना था की उक्त कार्य जिन लोगों ने किया है उन्हें ही इसका भुगतान करें तो ज्यादा बेहतर होगा। लेकिन यहां पर मजदूरों का तालमेल अधिकारीयों से नहीं बैठ पा रहा था। जिसके चलते अधिकारीयों ने एफईटडेफिट मजदूरों से बनवाया और बाकी बचे 6 लोगों को पेमेंट देने की पुष्टि करवाई उसके बाद पूरा पेमेंट दे दिया गया।
भुगतान प्रदेश के रेट के आधार पर ही किया
वन विभाग के अधिकारी ने कहा की जो रेट प्रदेश में विभाग देता आया है उसी रेट पर भुगतान किया जाने की बात कही गई थी। प्रदेश में गड्डा खुदाई का 14.20 पैसे का रेट बना हुआ है। मजदूरों ने जितने गड्डे खोदे हैं उसके मुताबिक उनका भुगतान 1 लाख 76 हजार 364 रूपये बन रहा है। उसके तहत पूर्व में किश्तों में 34 हजार रूपये दिये जा चुके हैं जिसकी पुष्टि भी इन मजदूरों ने की है। वहीं अब बचा हुआ भुगतान 1 लाख 42 हजार 364 रूपये हैं। जो की प्रत्येक मजूदर के मेहनताना के मुताबिक 7 हजार 909 रूपये के लगभग बनती है जिसे देने को विभागीय अधिकारी तैयार है। किंतु मजदूरों का कहना है की यह रूपया पूरा एक साथ उन्हें दे दिया जावे बाकी जो बचे हैं, उन्हें गांव जाकर वे दे देंगे। लेकिन विभागीय अधिकारी का कहना है की यह रूपया मौजूद मजदूरों को देने में कोई आपत्ति नहीं है हम देने को तैयार है, लेकिन जो मजदूर यहां पर मौजूद है सिर्फ उन्हीं का भुगतान किया जा सकता है, बाकी बचे मजदूरों को यहां आकर हस्ताक्षर कराकर भुगतान कर दे देंगे। लेकिन अंत में इसका निराकरण कर एक एफईटडेफिट तहसील कार्यालय से बनवाकर संपूर्ण भुगतान 1 लाख 76 हजार 364 रूपये नगदी दे दिये गये।

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