रचना: जल्लिया वाला बाघ में वसंत (- सुभद्रा कुमारी चौहान)

यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथव

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चन्द्रकांत देवताले से मुलाकात..

समाचार लाइन के "ब्यूरो चीफ" उज्जैन "आदित्य त्रिवेदी" ने कुछ समय पूर्व  हिंदी के प्रसिद्ध कवि "प्रोफेसर चंद्रकांत देवलाल जी " से उनके जीवन एवं उपलब्धिय

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