वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद यह बजट जोखिम उठाने की क्षमता, नवाचार को प्रोत्साहन और रोजगार आधारित विकास पर केंद्रित दिखाई देता है। यह बजट न केवल भारत की वित्तीय और सॉफ्ट पावर का प्रभावी ढंग से उपयोग करता है, बल्कि नए जमाने के क्षेत्रों और देश की युवा शक्ति में निर्णायक निवेश भी करता है। है। भारत की यह युवा आबादी देश के ऊर्जा केंद्र की तरह है। यह बजट आत्मविश्वास के साथ भविष्य की भाषा बोलता है, जिसमें दुर्लभ खनिज, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया है। चूंकि यह कोई चुनावी वर्ष नहीं है, इसलिए बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज साफ नजर आता है।
वित्त मंत्री द्वारा लगातार नौवां बजट पेश करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, और इसमें युवाओं, महिलाओं और दिव्यांगजनों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना स्वागत योग्य कदम है। पिछला बजट जहां कुछ विशेष प्रांतीय क्षेत्रों तक सीमित लग सकता था, वहीं यह बजट अपेक्षाकृत सर्वांगीण, समावेशी और संतुलित है जिसमें विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और कृषि—तीनों को उचित अनुपात में स्थान दिया गया है। भारत के मौजूदा विकास चरण में कौशल निर्माण, नई प्रतिभा और पूंजी निर्माण की आवश्यकता सबसे अधिक है। सरकार ने इसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ करार देते हुए अपने कार्यकाल के दौरान किए गए 350 से अधिक सुधारों को रेखांकित किया है। हालांकि, विनियमन में ढील की बात तो कही गई है, लेकिन किन क्षेत्रों में यह लागू होगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।
इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक पहलू ‘दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) पर केंद्रित रणनीति है। वर्तमान में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर चीन का वर्चस्व है, जो खनन से लेकर प्रोसेसिंग और मैग्नेट उत्पादन तक को नियंत्रित करता है। इससे चीन को एक बड़ा भू-राजनीतिक लाभ मिलता है। इसी कारण अमेरिका और अन्य विकसित देश वैकल्पिक स्रोतों और घरेलू उत्पादन पर जोर दे रहे हैं। रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों में इन खनिजों के महत्व को देखते हुए, इस बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज संपन्न राज्यों में समर्पित ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ बनाने का प्रस्ताव दूरदर्शी कदम है। खनन, प्रोसेसिंग और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने से हमें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। वहीं, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा देश के तकनीकी आधार और बौद्धिक संपदा तंत्र को मजबूती देगी।
शहरीकरण और शहरों को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने का विजन बहुत ही दूरदर्शी है। यह दृष्टिकोण संकेत देता है कि विकास को केवल महानगरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, टियर-II और टियर-III शहरों के साथ-साथ मंदिर-नगरों के विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करेगा, जिससे विकास का विकेंद्रीकरण होगा और नए सांस्कृतिक व आर्थिक हॉटस्पॉट बनेंगे। सराहनीय बात यह है कि बजट में मानसिक स्वास्थ्य, ट्रॉमा केयर, ‘केयर इकोनॉमी’, कंटेंट क्रिएटर्स और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे उभरते हुए क्षेत्रों को भी मान्यता दी गई है।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी बजट के प्रस्ताव उल्लेखनीय हैं। औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के साथ विश्वविद्यालय टाउनशिप स्थापित करने से ये टाउनशिप एकीकृत शैक्षणिक क्षेत्र और कौशल केंद्र के रूप में कार्य करेंगी, ताकि उद्योगों की जरूरतों और शैक्षणिक शिक्षा के बीच के अंतर को कम किया जा सके। उच्च शिक्षा में विज्ञान और तकनीकी विषयों को बढ़ावा, हर जिले में बालिका छात्रावास और शोध गतिविधियों में निवेश से दीर्घकालिक लाभ की उम्मीद की जा सकती है। वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए बजट में एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल भौतिकी) और एस्ट्रोनॉमी (खगोल विज्ञान) के लिए संसाधन आवंटित किए गए हैं, जिसमें नई टेलीस्कोप सुविधाएं और ‘नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप’ का विकास शामिल है।
पर्यटन क्षेत्र के लिए बजट में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी’ की स्थापना और 20 प्रतिष्ठित स्थलों पर 10,000 गाइडों के कौशल विकास के लिए पायलट योजना पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाएगी। ‘नेशनल डिजिटल नॉलेज ग्रिड’ के माध्यम से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थलों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिससे शोधकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में ट्रेकिंग और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से खेल ढांचे को मजबूत करने पर भी सरकार का फोकस बना हुआ है, जिसमें युवा केंद्र में रहेंगे।
उद्योग जगत के लिए लिए भी बजट के संकेत सकारात्मक है। सरकार ने MSME को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए उन पर अपना भरोसा दोहराया है। समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर विनिर्माण और सेवा अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती प्रदान करेगा। एक और चर्चा का विषय बैंकिंग उद्योग की समीक्षा के लिए उच्च अधिकार प्राप्त समिति का गठन है, जो बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन का संकेत देता है।
कर व्यवस्था के मोर्चे पर बड़े बदलाव पहले ही किए जा चुके हैं, इसलिए इस बजट में कोई बड़ा आश्चर्य नहीं रहा। प्रक्रियात्मक सरलता और टीडीएस-टीसीएस दरों में राहत स्वागतयोग्य है। शेयर बायबैक पर पुराने नियमों में सुधार छोटे निवेशकों के लिए सकारात्मक कदम है एवं सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।। हालांकि, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स में वृद्धि विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग पर असर पड़ सकता है। वहीं, डेटा सेंटरों के लिए टैक्स छूट को 2047 तक बढ़ाना डिजिटल बुनियादी ढांचे के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मैक्रो-इकोनॉमिक दृष्टिकोण से देखें तो पूंजीगत व्यय और सरकारी उधारी दोनों में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है। इससे विकास को गति तो मिलती है, लेकिन राज्यों द्वारा अत्यधिक उधारी और गैर-उत्पादक खर्च (freebies) क चिंता का विषय है, क्योंकि इससे निजी क्षेत्र के लिए उधारी की लागत बढ़ जाती है और बॉन्ड मार्केट का स्वस्थ विकास बाधित होता है।
कुल मिलाकर, यह बजट भारत की आर्थिक सोच में बदलाव का संकेत देता है। सरकार पारंपरिक समाजवाद से आगे बढ़ते हुए, पूर्ण पूंजीवाद को अपनाए बिना एक व्यावहारिक ‘मार्केट आधारित’ रास्ता चुनती नजर आती है। बाजार की भूमिका को स्वीकार करते हुए सीमित लेकिन प्रभावी सरकारी हस्तक्षेप पर जोर दिया गया है। यदि राज्यों के स्तर पर वित्तीय अनुशासन और वित्तीय बाजारों में सुधार के साथ यह दृष्टिकोण आगे बढ़ता है, तो यह बजट भारत को टिकाऊ विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले चरण के लिए तैयार कर सकता है।
लेख : –

आदित्य त्रिवेदी (अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायालय)

हर्ष मंत्री (सीए एवं निदेशक, अर्थ विधि)








