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मध्यप्रदेश सरकार के 22 विधायकों के इस्तीफे से कमलनाथ सरकार अपने आप नहीं गिरेगी। कमलनाथ खुद इस्तीफा दें या फ्लोर टेस्ट होने की स्थिति में वे बहुमत साबित न कर पाएं, तभी सरकार गिरेगी।
पहला समीकरण: अगर विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो जाएं।
मध्यप्रदेश के 2 विधायकों के निधन के बाद कुल सीटें = 228
इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के विधायक = 22
ये इस्तीफे स्पीकर ने मंजूर किए तो सदन में सीटें (228-22) = 206
इस स्थिति में बहुमत के लिए जरूरी = 104
भाजपा = 107 (बहुमत से 3 ज्यादा)
कांग्रेस+ = 99 (बहुमत से 5 कम)
इस स्थिति में भाजपा फायदे में रहेगी। उसके पास बहुमत के लिए जरूरी 104 से 3 ज्यादा यानी 107 का आंकड़ा रहेगा। वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।
कांग्रेस के 92 विधायक हैं।
दूसरा समीकरण: अगर निर्दलीय विधायकों ने पाला बदला और विधायकों के इस्तीफे के बाद उपचुनाव हुए तो?
भाजपा के पास 107 विधायक हैं। 4 निर्दलीय उसके समर्थन में आए तो भाजपा+ की संख्या 111 हो जाती है।
कांग्रेस विधायकों की छोड़ी 22 सीटों और 2 खाली सीटों को मिलाकर 24 सीटों पर उपचुनाव होने पर भाजपा को बहुमत के लिए 5 और सीटों की जरूरत होगी।
अगर निर्दलीयों ने भाजपा का साथ नहीं दिया तो उपचुनाव में पार्टी को 9 सीटें जीतनी होंगी।
वहीं, कांग्रेस को निर्दलियों के साथ रहने पर उपचुनाव में 17 और निर्दलियों के पाला बदलने पर 21 सीटें जीतनी होंगी।
तीसरा समीकरण: बसपा के 2 और सपा के 1 विधायक भी भाजपा के साथ आ जाएं तो?
भाजपा के पास 107 विधायक हैं। 4 निर्दलीय, 2 बसपा और 1 सपा का विधायक भी साथ आ जाएं तो भाजपा+ की संख्या 114 हो जाती है।
उपचुनाव होने पर भाजपा को बहुमत के लिए सिर्फ 2 और सीटों की जरूरत होगी।
वहीं, कांग्रेस को निर्दलीय विधायकोंका साथ मिलनेपर 20 सीटों की जरूरत होगी। निर्दलीय विधायक अलग हो गएतो कांग्रेस कोसभी 24 सीटें जीतनी होंगी।
चौथा समीकरण: अगर सभी विधायकों को स्पीकर अयोग्य करार दे दें तो?
इस स्थिति में ऊपर की स्थितियां ही लागू होंगी। सिर्फ अयोग्य करार दिए गए विधायक उपचुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
पांचवां समीकरण: अगर कांग्रेस के सभी विधायकों ने इस्तीफे दे दिए तो?
इस स्थिति में राज्यपाल तय करेंगे कि मध्यावधि चुनाव कराने हैं या उपचुनाव। उपचुनाव होने की स्थिति में भाजपा फायदे में रहेगी और राज्यपाल उसे सरकार बनाने का मौका देंगे।
क्या स्पीकर इन विधायकों को अयोग्य करार दे सकते हैं?
स्पीकर इन विधायकों को बुलाकर पूछेंगे कि क्या ये इस्तीफे उन्होंने अपनी मर्जी से दिए हैं। अगर ऐसा है तो इस्तीफा स्वीकार करने के अलावा स्पीकर के पास कोई विकल्प नहीं रहेगा। हालांकि, कर्नाटक में विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को अयोग्य करार दे दिया था और उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा था।