कोरोना संकट में ना हो दिक्कत, कोलकाता के वैज्ञानिक ने बनाया ‘पॉकेट वेंटिलेटर’, वजन 250 ग्राम - Samacharline.com
Live Broadcast

Shri Mahakal Sawari Direct Telecast

samacharline.com | Straight from Mahakal Dham

📍 Location: Mahakaleshwar, Ujjain
🚩 Event: Holy Pavitra Sawari

Watch direct live telecast and divine darshan of Lord Mahakal's holy procession. Streamed live in HD directly on this portal.

samacharline.com
होम

कोरोना संकट में ना हो दिक्कत, कोलकाता के वैज्ञानिक ने बनाया ‘पॉकेट वेंटिलेटर’, वजन 250 ग्राम

कोलकाता के एक वैज्ञानिक ने पॉकेट वेंटिलेटर बनाया है. कोरोना संकट के वक्त वेंटिलेटर को लेकर काफी दिक्कतें आ रही थीं, इसी बीच ये नया आविष्कार लोगों के लिए काफी लाभदायक हो सकता है.

कोरोना काल में जब देश में वेंटिलेटर को लेकर संकट बढ़ रहा था, तब हर ओर हाहाकार मचा था. अब कोलकाता के एक वैज्ञानिक ने इस समस्या का हल निकाला है और एक पॉकेट वेंटिलेटर का आविष्कार किया है.

डॉ. रामेंद्र लाल मुखर्जी, जो एक इंजीनियर हैं और लगातार इस तरह के आविष्कार करते रहते हैं. उन्होंने एक बैटरी से चलने वाला पॉकेट वेंटिलेटर तैयार किया है, जो किसी मरीज को तुरंत राहत दे सकता है. ये आसानी से काम करता है और सस्ता भी है, ऐसे में अगर किसी मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है उसके लिए ये लाभदायक हो सकता है.

डॉ. मुखर्जी का कहना है कि कोरोना संकट के बीच मेरा ऑक्सीजन लेवल 88 तक पहुंच गया था, तब मेरा परिवार मुझे अस्पताल ले जाना चाहता था. मैं संकट से बाहर आ गया, लेकिन इसके बाद मेरे दिमाग में मरीजों की मदद करने के लिए आइडिया आया. ठीक होने के बाद उन्होंने इसपर काम भी शुरू कर दिया और 20 दिनों में ये तैयार हो गया.

जानकारी के मुताबिक, इस डिवाइस में दो यूनिट हैं पावर और वेंटिलेटर जो कि मास्क से अटैच है. एक बटन दबाते ही वेंटिलेटर काम करना शुरू कर देता है और साफ हवा को मरीज तक पहुंचाता है. मुखर्जी के मुताबिक, अगर किसी मरीज को कोविड है तो यूवी फिल्टर वायरस मारने में मदद करता है और हवा की सफाई करता है.

इस वेंटिलेटर की मदद से वायरस कम फैलेगा, मरीजों-डॉक्टरों को राहत मिलेगी. उन्होंने ये भी दावा किया कि ब्लैक फंगस के मामले जब बढ़ रहे हैं, तब ऐसे वक्त में ये मरीजों के लिए मददगार हो सकता है.

जानकारी के मुताबिक, इस डिवाइस में दो यूनिट हैं पावर और वेंटिलेटर जो कि मास्क से अटैच है. एक बटन दबाते ही वेंटिलेटर काम करना शुरू कर देता है और साफ हवा को मरीज तक पहुंचाता है. मुखर्जी के मुताबिक, अगर किसी मरीज को कोविड है तो यूवी फिल्टर वायरस मारने में मदद करता है और हवा की सफाई करता है.

इस वेंटिलेटर की मदद से वायरस कम फैलेगा, मरीजों-डॉक्टरों को राहत मिलेगी. उन्होंने ये भी दावा किया कि ब्लैक फंगस के मामले जब बढ़ रहे हैं, तब ऐसे वक्त में ये मरीजों के लिए मददगार हो सकता है.

खास बात ये है कि पॉकेट वेंटिलेटर में एक कंट्रोल नॉब है, जो कि हवा के फ्लो को कंट्रोल कर सकती है. इसका वजह सिर्फ 250 ग्राम है, जबकि ये बैटरी से चल सकता है. एक बार चार्ज करने पर ये 8 घंटे तक काम कर सकता है. इतना ही नहीं, एंड्रॉयड फोन के चार्जर से इसे चार्ज किया जा सकता है. कोरोना संकट के बीच जब वेंटिलेटर को लेकर इतनी समस्या थी, ऐसे वक्त में अगर ये आविष्कार सच में कारगर साबित होता है तो काफी लाभदायक होगा.