अचानक नहीं, सोची-समझी साजिश के तहत हुई श्रद्धा की हत्या? पुलिस को गुमराह करते हैं आफताब जैसे लोग - Samacharline.com

असाधारण व्यक्तित्व और अनुशासन की प्रतिमूर्ति थे विनोद कुमारजी

आज एक साधारण सी वेशभूषा में...

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘Maverick Jaspal: The Man Who Changed Indian Shooting’ पुस्तक का किया विमोचन, जसपाल राणा के खेल जीवन, संघर्ष और भारतीय निशानेबाजी में योगदान को रेखांकित करती है पुस्तक

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से...

मुख्यमंत्री धामी ने SDRF उत्तराखंड को ISO 9001:2015 प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य संस्कृति, दक्षता और सेवा समर्पण का प्रतीक है यह उपलब्धि : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य...

देशहोम

अचानक नहीं, सोची-समझी साजिश के तहत हुई श्रद्धा की हत्या? पुलिस को गुमराह करते हैं आफताब जैसे लोग

अपोलो अस्पातल के सीनियर साइकियाट्रिस्ट डॉ. वोहरा के मुताबिक यह हत्या अचानक नहीं की गई बल्कि सोची समझी साजिश के तहत हुई वरना आफताब को पछतावा होता। उन्होंने कई अन्य वजहें भी बताईं।

श्रद्धा मर्डर केस के आरोपी आफताब पूनावाला का पॉलीग्राफ टेस्ट शुरू हो गया है। दिल्ली पुलिस जल्द नार्को टेस्ट भी करवा सकती है। इससे पहले आफताब साकेत कोर्ट में पेश किया गया था। उसकी हिरासत चार दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। हालांकि कोर्ट में आफताब ने अपना जुर्म कबूल नहीं किया। वहीं पुलिस के सामने उसने आसानी से हत्या की बात कबूल कर ली थी। वह अपनी लिवइन पार्टनर श्रद्धा की हत्या का आरोपी है। पुलिस के सामने आफताब ने कहा था कि अचानक बहस हुई और गुस्से में उसने श्रद्धा की हत्या कर दी थी। हालांकि जानकारों का कहना है कि आफताब शातिर अपराधी है और वह झूठ बोल रहा है। उसने सोची समझी साजिश के तहत श्रद्धा की हत्या की थी।

अपोल अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. संदीप वोहरा ने भी यही बात कही  है। रिपोर्ट्स के मुताबिक साकेत कोर्ट में आफताब ने कहा था कि बहस की वजह से उसने यह क्राइम किया और यह सब अचानक हुआ। वहीं डॉ. वोहरा का कहना है कि यह  हत्या साजिश के तहत की गई। उन्होंने कहा, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि आफताब ने अचानक श्रद्धा की हत्या करदी। अगर ऐसा होता तो उसे पछतावा होता। अगर तुरंत नहीं तो बाद में जरूर  पछतावा होता। आप कई बार सुन चुके होंगे कि किसी ने अचानक किसी की हत्या कर दी और फिर सरेंडर करके जुर्म कबूल कर लिया। इसलिए यह केस अचानक हुई हत्या का नहीं हो सकता।

डॉ. वोहरा ने कहा, उसके दिमाग में लंबे समय से यह सब चल रहा था और  उसने पूरी योजना से हमला किया। जिस तरह से उसने हत्या की वह कोई साइकोपैथ ही कर सकता है। सामान्य व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा। ऐसे लोगों को हत्या के बाद कोई आत्मग्लानि भी नहीं होती है। उन्होंने कहा, आफताब जैसे लोग अपना बयान बदलकर पुलिस को भी गुमराह करते हैं। उसकी भावनाएं अलग तरह की होती हैं।

बता दें कि आफताब ने श्रद्धा की हत्या करने के बाद उसके शव को 35 टुकड़ों में काटकर फ्रिज में रख दिया था। इसके बाद वह अलग-अलग जगहों प र शव के टुकड़े फेंकता रहा। श्रद्धा के पिता की शिकायत के बाद हत्या के बारे में पता चला, वह भी 6 महीने के बाद। आफताब और श्रद्धा एक डेटिंग साइट के जरिए मिले थे। वे दो साल पहले मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हुए थे। श्रद्धा के पिता ने भी शक जताया था कि इस हत्या को सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा था कि आफताब के परिवार को पहले से ही इस बात की जानकारी थी।