Mumbai’s Redevelopment Revolution, Why India is Next -Isheta Boruah, Aditya Trivedi
Mumbai is being Rebuilt. India is...
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सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई कर सकता है, जिनमें धार्मिक स्थलों पर दावा पेश करने पर रोक संबंधी 1991 के अधिनियम को चुनौती दी गई है। संबंधित कानून के अनुसार, धार्मिक स्थलों के 15 अगस्त 1947 के स्वरूप में बदलाव के लिए वाद दाखिल नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने पूर्व राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी सहित छह याचिकाओं को सोमवार को सुनवाई के लिए लिस्टेड किया है, जिनमें इस कानून के प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
अदालत ने पिछली सुनवाई में क्या कहा?
एससी मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिनमें एक याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की है, जिन्होंने पूजास्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 की धारा- दो, तीन और चार को रद्द करने की अपली की है। उन्होंने तर्क दिया है कि यह किसी व्यक्ति या धार्मिक समूह को पूजा स्थल पर दावा करने और न्यायिक प्रक्रिया अपनाने से रोकता है। अदालत ने 9 सितंबर को सुनवाई के दौरान कहा था कि याचिका में वर्ष 1991 के कानून के कई प्रावधानों को चुनौती दी गई है और इसे न्यायिक समीक्षा के लिए 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ को सौंपा जा सकता है। अदालत ने इसके साथ ही केंद्र से जवाब देने को कहा था।