उत्पादन घटकर 15% पर आया, बाजार में बनी रहेगी महंगाई, कम उत्पादन और बढ़ती लागत ने शरबती 306 को पीछे किया, राज 4037 बनी पसंद - Samacharline.com
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उत्पादन घटकर 15% पर आया, बाजार में बनी रहेगी महंगाई, कम उत्पादन और बढ़ती लागत ने शरबती 306 को पीछे किया, राज 4037 बनी पसंद

गंजबासौदा (ओमप्रकाश चौरसिया)। अपनी सुनहरी चमक और खास स्वाद के लिए देश-विदेश में पहचान रखने वाला शरबती गेहूं इस साल उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ने वाला है। मांग के मुकाबले इसकी उपज घटकर महज 10 से 15 प्रतिशत रह गई है। ऐसे में बाजार में इसकी कमी और बढ़ती मांग के कारण दामों में स्थायी उछाल की स्थिति बन रही है। कभी किसानों की पहली पसंद रहा शरबती गेहूं की 306 किस्म अब धीरे-धीरे खेतों से गायब होने की कगार पर है। पिछले दस वर्षों में करीब 90 प्रतिशत किसानों ने इस किस्म से दूरी बना ली है। आने वाले तीन वर्षों में शेष किसान भी इसकी खेती बंद कर सकते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण कम उत्पादन और बढ़ती लागत है। किसान अब अधिक पैदावार देने वाली नई किस्मों-एचआई 1544, राज 4037, 1650, 1634, हर्षिता और सुजाता की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। ये किस्में दिखने में शरबती जैसी ही चमकदार हैं। बाजार में अच्छी कीमत भी दिला रही हैं। कृषक भूपेंद्र यादव और मुंशी लाल रघुवंशी बताते हैं कि जहां शरबती 306 की पैदावार एक क्विंटल बीज पर 5-6 क्विंटल तक सीमित रहती है, वहीं नई किस्मों से 10-12 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है। यही वजह है कि 90 प्रतिशत किसान अब इन नई किस्मों की खेती कर रहे हैं।

जिले की पहचान इसी से

गौरतलब है कि विदिशा और गंजबासौदा मंडी की पहचान लंबे समय तक शरबती गेहूं के कारण ही बनी रही है। पहले जिले में कुल उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा शरबती का होता था। अब यह घटकर करीब 10 प्रतिशत रह गया है। विकासखंड में 52 हजार हेक्टेयर में होने वाली गेहूं की खेती में अब केवल 5 हजार हेक्टेयर के आसपास ही शरबती का उत्पादन हो रहा है।

प्रतिस्पर्धा ही मुख्य कारण

कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि बदलते समय में किसान अधिक उत्पादन की प्रतिस्पर्धा में शामिल हों चुके हैं। कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. प्रवीण जागा के अनुसार, नई विकसित किस्में शरबती के समान ही चमक और गुणवत्ता देती हैं। उनकी पैदावार कहीं अधिक है। यही कारण है कि किसानों का झुकाव तेजी से इनकी ओर बढ़ रहा है।

सिंचाई सुविधा का प्रभाव

सिंचाई सुविधाओं में बढ़ोतरी भी इस बदलाव का एक बड़ा कारण बनी है। किसान प्रमोद शर्मा के अनुसार, पहले विदिशा, सागर, सीहोर, अशोकनगर, रायसेन और गुना जिलों में सिंचाई का अभाव था। इससे शरबती गेहूं की खेती अधिक होती थी। अब सिंचाई क्षेत्र बढ़ने से किसान अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बाहर की डिमांड ज्यादा

अनाज व्यापारी बसंत अग्रवाल बताते हैं कि शॉर्टक्स प्लांट में प्रोसेसिंग के बाद जब गेहूं का दाना शरबती जैसा दिखने लगता है, तो उसका भाव 3800 से 4000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच जाता है। यही गेहूं पांच सितारा होटलों और ब्रांडेड कंपनियों तक पहुंचते-पहुंचते 5000 रुपए क्विंटल तक बिकता है।

शरबती की पैदावार कम

शरबती 306 की पैदावार घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। उसका स्थान नई उन्नत किस्में तेजी से ले रही हैं।

आशीष आर्य, एसएडीओ, कृषि विभाग, गंजबासौदा।

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